गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में योगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। पावन पूर्णिमा तिथि पर आयोजित इस समारोह में देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे संत-महात्माओं ने हिस्सा लिया और महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के जीवन, विचारों और समाज के लिए किए गए कार्यों को याद किया। समारोह में श्रीमद्भागवत कथा, संतों के प्रवचन और श्रद्धांजलि कार्यक्रम के साथ महंत दिग्विजयनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के योगदान को स्मरण किया गया। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़े शिक्षण संस्थानों के प्राचार्य, आचार्य, छात्र-छात्राएं, अभिभावक और जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने उद्बोधन में महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के व्यक्तित्व, कृतित्व और उनके दूरदर्शी विचारों को स्मरण किया, इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूर्व प्राचार्य डॉ रामनरेश पाण्डेय द्वारा लिखित श्री हनुमत कथा पूजनम पुस्तक का विमोचन भी किया।
महापुरुष वर्तमान नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए करते हैं काम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सामान्य व्यक्ति का चिंतन अक्सर अपने और अपने परिवार तक सीमित रहता है, लेकिन महापुरुषों की दृष्टि आने वाली पीढ़ियों और पूरे समाज पर होती है। आज से लगभग नौ दशक पहले, जब देश गुलामी के दौर से गुजर रहा था और संसाधनों का अभाव था, तब महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने गोरखपुर में शिक्षा की ऐसी नींव रखी, जो आगे चलकर विशाल शिक्षा व्यवस्था का आधार बनी।
वर्ष 1932 में महाराणा प्रताप कॉलेज की स्थापना उनकी दूरदर्शी सोच का महत्वपूर्ण उदाहरण रही। शिक्षा को समाज और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाने की उनकी सोच आज भी संस्थाओं के माध्यम से आगे बढ़ रही है।
महाराणा प्रताप के नाम पर कॉलेज रखने के पीछे था बड़ा संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि जब महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज से पूछा गया कि कॉलेज का नाम महाराणा प्रताप के नाम पर ही क्यों रखा गया, तो उन्होंने महाराणा प्रताप के जीवन को युवाओं के लिए आदर्श बताया। महाराणा प्रताप ने स्वदेश और स्वाभिमान के लिए कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष किया। महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज चाहते थे कि गोरखपुर की नई पीढ़ी केवल अपने भविष्य के बारे में नहीं, बल्कि देश और समाज के हित के बारे में भी सोचे। उनकी इसी सोच के साथ शिक्षा को संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभाव से जोड़ने पर जोर दिया गया।
एक शिक्षा संस्थान से खड़ा हुआ 50 से ज्यादा संस्थाओं का वटवृक्ष
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अंतर्गत लगभग 50 से 55 शिक्षण, प्रशिक्षण और सेवा संस्थाएं संचालित होने की बात कही गई। विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, आयुर्वेद कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक, महाविद्यालय, इंटर कॉलेज, शिशु शिक्षा संस्थान, अस्पताल, कृषि विज्ञान केंद्र और विभिन्न सेवा प्रकल्प शिक्षा एवं लोककल्याण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि यह विस्तार उस सोच का परिणाम है, जिसमें शिक्षा को केवल रोजगार हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की मजबूत बुनियाद माना गया।
बालिका और संस्कृत शिक्षा पर भी था विशेष जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की दूरदर्शिता का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे समय में बालिका शिक्षा और संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा दिया, जब इन क्षेत्रों में सामाजिक जागरूकता आज की तुलना में सीमित थी। उनकी सोच केवल तत्कालीन परिस्थितियों तक सीमित नहीं थी। वे ऐसी पीढ़ी के निर्माण की दिशा में काम कर रहे थे, जो शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी समझे। लोककल्याण को लेकर उनकी सोच का उल्लेख करते हुए कहा गया कि मठ और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग समाज के हित में किया जाना चाहिए। शिक्षा के विस्तार और संस्थाओं के निर्माण के जरिए अधिक से अधिक विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने की भावना को इसी सोच से जोड़ा गया।
नाथ परंपरा से लेकर सामाजिक समरसता तक, व्यापक थी सोच
समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के नाथ परंपरा और योगी महासभा को संगठित करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास समाज को अपनी परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और पहचान के प्रति जागरूक करने का था। गोरक्षपीठ की समरसता की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा गया कि अलग-अलग पंथ और परंपराओं के बावजूद समाज को एक व्यापक सांस्कृतिक परिवार के रूप में देखने की आवश्यकता है।
संस्थापकों के आदर्शों को जीवन का हिस्सा बनाएं युवा
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से जुड़े छात्र-छात्राओं और शिक्षण संस्थानों को संदेश देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संस्थापकों के आदर्शों को केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। शिक्षा, सेवा, अनुशासन, राष्ट्रभाव और सामाजिक समरसता को जीवन में उतारकर ही नई पीढ़ी महापुरुषों के विचारों को आगे बढ़ा सकती है। श्रद्धांजलि समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे संत-महात्माओं ने महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की स्मृति को नमन किया। गोरखनाथ मंदिर की पावन धरती पर आयोजित इस कार्यक्रम में उनके योगदान और विचारों को याद करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि पर आयोजित यह समारोह उनके शिक्षा, सेवा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभाव से जुड़े विचारों को याद करने के साथ नई पीढ़ी को उन आदर्शों को आगे बढ़ाने का संदेश भी दे गया।