बुरहानपुर : ग्राम घाघरला में सरकारी राशन वितरण व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। गांव में मुफ्त राशन योजना के तहत बांटे जा रहे चावल की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। खराब चावल मिलने से नाराज ग्रामीणों ने राशन दुकान पर विरोध प्रदर्शन करते हुए चावल लेने से साफ इंकार कर दिया।

ग्रामीणों का आरोप है कि राशन में दिए जा रहे चावल बेहद खराब, सड़े हुए और खाने योग्य नहीं हैं। ग्रामीण महिला बारकी बाई ने बताया कि चावल से तेज बदबू आ रही थी और उसमें कीड़े व मरी हुई इल्लियां दिखाई दे रही थीं। वहीं ग्रामीण चंद्र भान राठौड़ ने कहा कि चावल के दाने टूटे हुए हैं और गुणवत्ता इतनी खराब है कि इसे खाना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गरीबों को ऐसा राशन दिया जा रहा है जो पशुओं को खिलाने लायक भी नहीं है। ग्रामीण सोहन लाल ने कहा कि सरकार गरीबों के लिए मुफ्त राशन भेजती है ताकि उनका पेट भर सके, लेकिन यहां खराब और सड़ा हुआ अनाज बांटा जा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक जब राशन के बोरे खोले गए तो उनमें से बदबू आने लगी। कई लोगों ने दावा किया कि यह चावल काफी पुराना है और लंबे समय से खराब अनाज गरीबों में वितरित किया जा रहा है।

घटना के बाद राशन दुकान पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और खराब चावल वापस लेने की मांग करने लगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, चावल के नमूनों की जांच करवाने और दोषी सप्लायर व अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वहीं वेयरहाउस से जुड़े हमाल संजू ने बताया कि अनाज की जांच बंबू डालकर की जाती है, लेकिन खराब चावल राशन दुकान तक कैसे पहुंचा, यह जांच का विषय है।
इस घटना के बाद क्षेत्र में राशन वितरण व्यवस्था और गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।