कोरोना काल में जहां पूरी दुनिया रुक सी गई थी वही दूसरी तरफ यूनीफाइड पेमेंट्स सिस्टम यानी यूपीआई में तेजी देखने को मिली है। कोरोना काल में यूनीफाइड पेमेंट्स सिस्टम यानी यूपीआई के माध्यम से लेन देन का आंकड़ा 4 लाख करोड़ रुपये से पार पहुंच गया है, प्रचलन में मुद्रा (केंद्रीय सूचना आयोग) पूरे कैलेंडर वर्ष में 22 प्रतिशत बढ़ी है।
आप को बता दे कि केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) वह मुद्रा है, जो भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी मुद्रा और व्यवस्था से हटाई गई मुद्रा का अंतर होता है। अगर आप 2019 में हुई 11.8 प्रतिशत वृद्धि से तुलना करें और पूरी तरह या लॉकडाउन के हिसाब से देखें तो सीआईसी में वृद्धि बहुत तेजी में हुई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी व्याख्या आर्थिक अवधारणा ‘सावधानी के लिए नकदी धारण करने’ के रूप में की जा सकती है। नकदी जमा करने की शुरुआत 2020 की शुरुआत से ही हो गई, जब कोरोना का फैलवा तेजी से होने लगा तब देश की आम जनता महामारी के डर से लोगों ने आपातकाल में इस्तेमाल के लिए नकदी बनाए रखने और नकद का इस्तेमाल शुरू कर दिया था।
जैसा की आप सब जानते है, देश में मार्च के अंत तक पूरी तरह से लॉकडाउन हो गया था। उस समय पीएमसी बैंक की विफलता और कुछ बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की चूक की वजह से वित्तीय व्यवस्था पर आम जनता का भरोसा प्रभावित था।
लॉकडाउन के पहले भी आर्थिक वृद्धि में सुस्ती नजर आ रही थी। इन सभी वजहों के कारण लोगों ने नकदी जमा करना शुरू कर दिया। कैलेंडर वर्ष के शुरुआती चार महीनों में सीआईसी में वृद्धि पूरे 2019 की तुलना में ज्यादा थी।
महामारी के दौरान खासकर शहरी इलाकों में डिजिटल लेन देन में बढ़ोतरी हुई है। उपनगरीय और ग्रामीण इलाकों में अभी भी अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा नकदी का है। महामारी के दौरान वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद ऑनलाइन की गई है, लेकिन कुछ जगहों पर डिलिवरी होने पर भुगतान नकद हुआ है।
भारतीय स्टेट बैंक समूह के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष ने कहा कि वर्ष 2020 परंपरागत साल था। परंपरागत रूप से जनता के बीच मुद्रा और जमा दोनों अलग अलग दिशा में जाते हैं।
घोष ने कहा, ‘बहरहाल मौजूदा परिदृश्य में दोनों साथ साथ चल रहे हैं, क्योंकि महामारी के कारण धन बचाने की प्रवृत्ति बढ़ी है और साथ ही लोग नकदी भी रख रहे हैं।’ दिलचस्प है कि इसका एक और पक्ष भी है। नोटबंदी और लॉकडाउन जैसी वजहों से डिजिटल मनी को बल मिला है।