पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के विभाजन और उससे पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी का नाम हटाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला शिक्षा सुधार के उद्देश्य से नहीं बल्कि राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।
अजय सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विश्वविद्यालय को तीन हिस्सों में बांटने की योजना केवल इसलिए बना रही है ताकि राजीव गांधी का नाम संस्थान से हटाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह कदम जनभावनाओं के खिलाफ है और इससे शिक्षा व्यवस्था को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा।
उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने देश में कंप्यूटर और तकनीकी क्रांति की शुरुआत कर आधुनिक भारत की मजबूत नींव रखी थी। डिजिटल इंडिया की अवधारणा को आगे बढ़ाने में उनका ऐतिहासिक योगदान रहा है। इसी कारण तकनीकी विश्वविद्यालय का नाम उनके सम्मान में रखा गया था।
अजय सिंह ने कहा कि किसी भी महापुरुष को उसके देशहित में किए गए कार्यों से पहचाना जाना चाहिए, लेकिन भाजपा सरकार राष्ट्रीय नेताओं और इतिहास को राजनीतिक नजरिए से देख रही है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और आम जनता इस फैसले का हर स्तर पर विरोध करेगी। अजय सिंह के अनुसार इतिहास और महापुरुषों के योगदान को मिटाने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों और जनभावनाओं का अपमान है।