सासाराम । राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बिहार और झारखंड के मुख्यमंत्रियों का इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर एक साथ बैठकर चर्चा करना सकारात्मक कदम है। डेहरी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कुशवाहा ने कहा कि उन्होंने भी सोन नदी के जल बंटवारे के मुद्दे को कई बार उठाया है और इसे लेकर विभागीय स्तर पर पत्राचार किया था। उन्होंने इस दिशा में पहल के लिए जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार जताया।
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सोन नदी में मध्य प्रदेश के बाणसागर के साथ-साथ रिहंद से भी पानी आता है। यह विषय केवल बिहार और झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे करीब पांच राज्यों के हित जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कई तरह की समस्याएं सामने आईं, जिसका असर बिहार पर भी पड़ा। उनका मानना है कि अब दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक के बाद इस समस्या के समाधान की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
कुशवाहा ने कहा कि सोन नदी के पानी का मुद्दा रोहतास, काराकाट और औरंगाबाद क्षेत्र के किसानों के लिए बेहद संवेदनशील है। इन इलाकों की कृषि व्यवस्था सिंचाई के लिए सोन नदी के जल पर काफी हद तक निर्भर रहती है।उन्होंने उम्मीद जताई कि दिल्ली में हुई बैठक के बाद बिहार के किसानों के हित में ठोस और सकारात्मक फैसला सामने आएगा। उन्होंने बिहार और झारखंड के मुख्यमंत्रियों को भी इस विषय पर साथ बैठकर चर्चा करने के लिए धन्यवाद दिया।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख ने कहा कि सोन नदी के जल प्रबंधन का विषय व्यापक है और इसका प्रभाव कई राज्यों तक पहुंचता है। ऐसे में सभी संबंधित पक्षों के बीच समन्वय और संवाद के जरिए स्थायी समाधान निकालना जरूरी है।उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित इस विषय पर अब उच्चस्तरीय स्तर पर चर्चा होना बिहार के लिए उम्मीद की बात है। खासकर किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की दिशा में यह बैठक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।