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यूपी: हाथरस कांड से नाराज बौद्ध बने 236 वाल्मीकि

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यूपी: हाथरस कांड से नाराज बौद्ध बने 236 वाल्मीकि

हाथरस कांड से आहत बाल्मीकि समाज के 50 से ज्यादा परिवारों ने बुधवार को बौद्ध धर्म अपना लिया। इन परिवारों ने संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर के पड़पोते राजरत्न अंबेडकर की अगुवाई में विधिविधान के साथी बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। यह पंथ परिवर्तन क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

ठाकुर बाहुल्य क्षेत्र करहेड़ा गांव में बुधवार को एक दीक्षा ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। जिसमें वाल्मीकि समाज के 50 परिवारों के 236 लोगों एकत्र हुए और बौद्ध धर्म अपना लिया।

वाल्मीकि समाज के 236 लोग एकजुट हुए और उन्होंने बाबा साहब अंबेडकर के पड़पोते राजरत्न अंबेडकर की मौजूदगी में बौद्ध पंथ की दीक्षा ली।

इन परिवारों का आरोप है कि हाथरस कांड से वे लोग काफी ज्यादा आहत हुए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लगातार आर्थिक तंगी से जूझने के बावजूद इनकी कही सुनवाई नहीं होती और हर जगह इनकी अनदेखी की जाती है।

इस अवसर पर राजरत्न अंबेडकर ने कहा कि बौद्ध धर्म ही ऐसा धर्म है जिसमे किसी से कोई भेद भाव नहीं अपनाया जाता। बाकी जितने भी धर्म है उनमें दूसरे धर्म से आये लोगों के साथ भेद भाव जारी रहता है। इसी विशेषता को देखते हुए ही बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने बौद्ध धर्म को अपनाया था। जबकि उन्हें अन्य धर्म के लोगों ने लालच भी दिया था।

जिन लोगों ने बौद्ध धर्म अपना उनमें इंदर, रज्जो पवन आदि प्रमुख थे। हालांकि इससे पहले 14अक्टूबर को एक कार्यक्रम इन्होने बौद्ध धर्म की शिक्षा ली थी और उसके बाद आज बौद्ध धर्म अपना लिया।

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