रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: आचार्य चाणक्य का नाम आते ही लोगो में विद्वता आनी शुरु हो जाती है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति और विद्वाता से चंद्रगुप्त मौर्य को राजगद्दी पर बैठा दिया था। इस विद्वान ने राजनीति,अर्थनीति,कृषि,समाजनीति आदि ग्रंथो की रचना की थी। जिसके बाद दुनिया ने इन विषयों को पहली बार देखा है। आज हम आचार्य चाणक्य के नीतिशास्त्र के उस नीति की बात करेंगे, जिसमें उन्होने बताया है 4 चीजें हैं व्यक्ति के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण, जिसने भी रखा ध्यान हो गया सफल, आइये जानते हैं उन चार चीजों के बारे में…
नात्रोदक समं दानं न तिथि द्वादशी समा।
न गायत्र्या: परो मन्त्रो न मातुदैवतं परम्।।
आचार्य चाणक्य इस श्लोक के माध्यम से कहते हैं कि अन्न और जल के समान कोई दान नहीं है। उन्होने कहा कि जो व्यक्ति भूखे को अन्न और व्यासे को पानी पिलाता है, वही सच्चा इंसान है। आचार्य ने तर्क दिया है कि ऐसे व्यक्ति की देवी-देवता भी सुनते हैं। इसलिए व्यक्ति को जीवन में समय-समय पर अन्न दान करते रहना चाहिए।
इसके बाद आचार्य ने बताया है कि हिंदू पंचांग में द्वादशी तिथि को बेहद शुभ माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। मान्यता है कि द्वादशी तिथि को जो व्यक्ति उपवास रखता है, उसपर भगवान श्रीहरि अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
आचार्य चाणक्य़ ने बताया है कि हिंदू धर्म के प्रमुख मंत्रों में से गायत्री मंत्र एक है। उन्होने बताय है कि गायत्री मंत्र से बड़ा कोई मंत्र नहीं है। इस मंत्र को ऋषियों ने भी बेहद प्रभावशाली बताया है। कहते हैं कि इस मंत्र का जाप करने से आयु, प्राण, धन, शक्ति और ब्रह्मतेज की प्राप्ति होती है।
अंत में आचार्य ने माता को इस संसार में सबसे बड़ा तीर्थ देवता या गुरु बताया है। चाणक्य कहते हैं कि माता की सेवा करने वालों का सभी तीर्थों की यात्रा का पुण्य मिलता है। कहते हैं कि माता के चरणों में ही सभी देवता व तीर्थ होते हैं।