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बुरहानपुर में प्राकृतिक खेती से बदल रही कृषि की तस्वीर, महिला कृषक रत्ना दीदी बनीं प्रेरणा

बुरहानपुर की महिला कृषक रत्ना दीदी प्राकृतिक खेती के जरिए कृषि में बदलाव की मिसाल बन रही हैं। वे 3.5 एकड़ भूमि पर जैविक खेती, बीज बैंक और मिश्रित फसलों के माध्यम से आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे रही हैं।

By: Nivedita 
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बुरहानपुर में प्राकृतिक खेती से बदल रही कृषि की तस्वीर, महिला कृषक रत्ना दीदी बनीं प्रेरणा

बुरहानपुर जिले में प्राकृतिक खेती ने कृषि के स्वरूप को नई दिशा दी है। किसान अब रासायनिक खेती की बजाय जैविक और प्राकृतिक तरीकों को अपनाकर न केवल अपनी लागत कम कर रहे हैं, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में भी सुधार कर रहे हैं। इस बदलाव में महिला कृषकों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनकर उभरी है।

3.5 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहीं रत्ना दीदी

ग्राम बख्खारी की निवासी महिला कृषक रत्ना दीदी लगभग साढ़े तीन एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रही हैं। वे ज्वार, मक्का, चना, तुअर, उड़द के साथ-साथ सब्जियों की विविध फसलें जैसे बैंगन, लौकी, पालक, पपीता, हल्दी और प्याज आदि का उत्पादन कर रही हैं। मिश्रित एवं बहुफसली खेती से उनकी आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम, शिक्षा और प्रशिक्षण का योगदान

रत्ना दीदी ने न केवल खेती में नवाचार अपनाया है, बल्कि अपनी शिक्षा को भी आगे बढ़ाया है। उन्होंने अपनी बेटी के साथ कक्षा 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है और आगे भी पढ़ाई जारी रखी है। कृषि विज्ञान केंद्र से 5 दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीकों को समझा और अपने खेतों में लागू किया।

जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों का उपयोग

वे खेती में जीवामृत, बीजामृत, ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र और अग्नास्त्र जैसे प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग करती हैं। गोबर, गौमूत्र, गुड़ और प्राकृतिक पत्तियों से तैयार ये जैविक संसाधन मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ फसलों को कीटों से सुरक्षित रखते हैं। वे इन उत्पादों को स्थानीय बाजारों और हाट-बाजार में भी उपलब्ध कराती हैं।

 

 

बीज बैंक के माध्यम से देशी बीजों का संरक्षण

रत्ना दीदी ने देशी बीजों के संरक्षण के लिए बीज बैंक की पहल भी शुरू की है। इसमें बैंगन, लौकी, पालक, भिंडी और अन्य सब्जियों के पारंपरिक बीजों का संग्रह किया जा रहा है, जिससे जैव विविधता और पारंपरिक कृषि को बढ़ावा मिल रहा है।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं रत्ना दीदी

कृषि के साथ-साथ वे स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बैंक सखी और कृषि सखी के रूप में भी कार्य कर रही हैं। वे महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्हें मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का लाभ भी मिल रहा है।

किसानों के लिए प्रेरणा बनी प्राकृतिक खेती

रत्ना दीदी ने अन्य किसानों से अपील की है कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाकर कम लागत, बेहतर उत्पादन और स्वस्थ पर्यावरण की दिशा में आगे बढ़ें। राज्य सरकार भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्राकृतिक खेती और कृषि नवाचार को लगातार प्रोत्साहित कर रही है।

 

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