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बजट में किसानों के लिए दूरदृष्टि का अभाव, ट्रेड डील से संभावित संकट पर चुप्पी : अजय सिंह

पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मध्य प्रदेश बजट को दिशाहीन बताया। किसानों के लिए MSP बोनस नहीं, ट्रेड डील से संभावित संकट पर कोई योजना नहीं और बढ़ते कर्ज को बजट का काला पक्ष करार दिया।

By: Abhinav Tiwari 
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बजट में किसानों के लिए दूरदृष्टि का अभाव, ट्रेड डील से संभावित संकट पर चुप्पी : अजय सिंह

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को लेकर विपक्ष ने कड़ा रुख अपनाया है। अजय सिंह (सिंगरौली) ने बजट को दिशाहीन और दूरदृष्टि से विहीन बताते हुए कहा कि इसमें किसानों, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों की अनदेखी की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी सच्चाई बजट में दिखाई नहीं देती।

ट्रेड डील से किसानों पर संभावित संकट, कोई रणनीति नहीं

अजय सिंह ने कहा कि सरकार यह दावा कर रही है कि बजट प्रधानमंत्री के सपनों को साकार करने वाला है, लेकिन यह नहीं बताया गया कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील के लागू होने पर किसानों पर आने वाले संकट से निपटने के लिए क्या उपाय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बांगलादेश द्वारा भारत की बजाय अमेरिका से सूत और रेयान खरीदने के फैसले से कपास उत्पादक किसानों को भारी नुकसान होगा, जिसका असर मध्य प्रदेश पर भी पड़ेगा। इस संभावित खतरे से निपटने के लिए बजट में कोई ठोस योजना नहीं है।

एमएसपी और बोनस पर पूरी तरह चुप सरकार

पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि “हर उपज को दाम” का नारा देने वाली सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर एक शब्द तक नहीं कहा। बजट में एमएसपी पर बोनस देने की कोई घोषणा नहीं की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार आखिर किसानों को वाजिब दाम कहां से और कैसे देगी।

कर्ज के दलदल में धंसता प्रदेश

अजय सिंह ने बजट का सबसे “काला पक्ष” बताते हुए कहा कि प्रदेश का कुल कर्ज पांच लाख करोड़ रुपये पार करने की दिशा में है। बजट का बड़ा हिस्सा केवल ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है, जिससे विकास कार्यों के लिए संसाधन सीमित होते जा रहे हैं।

दाल उत्पादन में अव्वल, लेकिन दाल मिलें बंद

उन्होंने कहा कि सरकार यह दावा करती है कि प्रदेश दाल उत्पादन में पहले स्थान पर है, लेकिन दाल मिलें लगातार बंद हो रही हैं। इसके बावजूद बजट में इस समस्या के समाधान के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

अजय सिंह ने कहा कि प्रदेश में स्कूल भवनों की हालत जर्जर है। मरम्मत के लिए जो राशि रखी गई है, वह “ऊंट के मुंह में जीरा” जैसी है। हजारों स्कूल पहले ही बंद हो चुके हैं, कई स्कूल बंद होने की कगार पर हैं।  उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा लगता है जैसे सरकार स्कूलों का संचालन सरस्वती शिशु मंदिर को सौंपना चाहती है। यही स्थिति आंगनबाड़ी भवनों की भी है।

स्वास्थ्य ढांचे की कमजोर कड़ी

अजय सिंह ने कहा कि प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज तो खोले जा रहे हैं और सीटें भी बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन स्टाफ की भारी कमी को दूर करने के लिए कोई योजना नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पढ़ाने वाले ही नहीं होंगे, तो डॉक्टर कैसे तैयार होंगे। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों के इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के लिए भी बजट में पर्याप्त राशि नहीं रखी गई है।

निवेश और रोजगार पर सवाल

पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर इन्वेस्टर्स मीट आयोजित करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर नतीजे शून्य हैं। उन्होंने कहा कि बजट में इंडस्ट्रियल एरिया और आईटी पार्क का जिक्र तो है, लेकिन सरकार यह बताने में असफल रही है कि एमओयू के बाद कितने उद्योग आए और कितनों को रोजगार मिला

“बजट दिशाहीन, बिना विजन का दस्तावेज”

अजय सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि वित्त मंत्री कहते हैं “प्रजा के सुख में ही राजा का सुख है”, लेकिन बजट देखकर लगता है कि यहां का राजा प्रजा को दुखी करके सुख का अनुभव कर रहा है। उन्होंने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि यह बजट वास्तविक जरूरतों से कटा हुआ, बिना स्पष्ट विजन के तैयार किया गया दस्तावेज है, जिससे न तो किसान, न युवा और न ही आम जनता को कोई ठोस राहत मिलती है।

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