बड़वानी: शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से राहत प्रदान किए जाने के लिए शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी व लोकसभा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल को ज्ञापन सौंपा।
ट्रायबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष कसरसिंह सोलंकी ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा को निर्धारित अवधि (दो वर्ष) के भीतर उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। अन्यथा सेवा से पृथक करने या अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कार्रवाई का प्रावधान किया है।
जिससे 20 से 25 साल से सेवा दे रहे शिक्षकों में भय और रोष व्याप्त है। एसोसिएशन के प्रांतीय सचिव हेमेंद्र मालवीय ने बताया कि सांसदों को ज्ञापन सौंपकर मांग की गई कि सरकार अध्यादेश लाकर 2011 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से राहत प्रदान करें। सांसदों ने शिक्षकों को आश्वस्त किया कि सरकार शिक्षकों के साथ है। इस संबंध में मुख्यमंत्री व केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री से चर्चा कर उचित निराकरण का आश्वासन दिया।
प्रांतीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राधेश्याम यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा जारी आदेश से प्रदेश के शिक्षकों के सामने विषम परिस्थिति उत्पन्न हो रही है, जो अध्यापक संवर्ग से नियुक्त होकर जुलाई 2018 से शासकीय सेवा में नवीन शैक्षणिक संवर्ग के रूप में समाहित किए गए हैं। इन शिक्षकों की सेवा शर्तें और नियुक्ति की परिस्थितियां अन्य राज्यों से भिन्न और विशिष्ट है।
शिक्षक पात्रता परीक्षासंबंधी नियम वर्ष 2010 में प्रभावी हुआ है। इसलिए इसे पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना विधिसम्मत नहीं है। आरटीई अधिनियम 2009 के लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य नहीं था और उस समय की वैध न्यूनतम योग्यता के आधार पर उनकी नियुक्ति की गई थी। शिक्षकों की नियुक्ति एनसीटीई विनियम 2001 के अनुसार की गई थी।
उस समय टीईटी का कोई प्रावधान नहीं था। इसलिए नियुक्ति के समय की वैध योग्यता को बाद में बदला नहीं जा सकता। शिक्षकों ने अपनी नियुक्ति के समय लागू नियमों के आधार पर सेवा ग्रहण की हैए अतः बाद में नई शर्त लागू करना उनके वैध अधिकारों का हनन है।
आजाद अध्यापक संघ के जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र जाधव ने बताया कि नवीन शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षक एनपीएस योजना के अंतर्गत हैं तथा उनकी सेवा गणना 2018 से प्रारंभहोती है। सेवा समाप्ति की स्थिति में उनके परिवारों पर गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट उत्पन्न हो जाएगी। शिक्षकों द्वारा गृह व अन्य आवश्यकताओं के लिए ऋण लिए गए हैं। जिनकी अदायगी सेवा समाप्ति की स्थिति में असंभव हो जाएगी।
विशेष परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए नवीन शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षकों को पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से पूर्णतः मुक्त किया जाए। राज्य शासन द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका प्रस्तुत कर आवश्यक विधिक राहत प्राप्त की जाए। टीईटी के स्थान पर एक वैकल्पिक अल्पकालीन ब्रिज कोर्स लागू करने पर विचार किया जाए। जिससे शिक्षकों की सेवा सुरक्षित रह सके।
इस अवसर पर धर्मेंद्र भावसार, सुनील मुकाती, निलेश भावसार, रवि त्रिपाठी, आलेक्स थॉमस, लोकेश भट्ट, अखिलेश भावसार, मेहबूब खान, अम्बाराम वास्कले, अजय गोरे आदि उपस्थित थे।