यह प्रदर्शन सिर्फ विरोध नहीं था, बल्कि उन सैकड़ों मजदूरों की पीड़ा की आवाज थी, जो 1998-99 में मिल बंद होने के बाद से आज तक अपनी पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य बकाया के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
यह प्रदर्शन सिर्फ विरोध नहीं था, बल्कि उन सैकड़ों मजदूरों की पीड़ा की आवाज थी, जो 1998-99 में मिल बंद होने के बाद से आज तक अपनी पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य बकाया के लिए दर-दर भटक रहे हैं।