स्वामी हर्षानंद गिरि ने कहा कि पिंडदान करना उनके जीवन का सबसे कठिन निर्णय था। क्योंकि इसका अर्थ है अपने पुराने अस्तित्व और रिश्तों को पीछे छोड़ देना। उन्होंने कहा कि अब उनका जीवन धर्म, संस्कृति और समाज सेवा के लिए समर्पित रहेगा।
स्वामी हर्षानंद गिरि ने कहा कि पिंडदान करना उनके जीवन का सबसे कठिन निर्णय था। क्योंकि इसका अर्थ है अपने पुराने अस्तित्व और रिश्तों को पीछे छोड़ देना। उन्होंने कहा कि अब उनका जीवन धर्म, संस्कृति और समाज सेवा के लिए समर्पित रहेगा।