स्वयं सहायता समूह ऐसे छोटे समूह होते हैं जिनमें आमतौर पर 10 से 20 लोग, विशेषकर महिलाएँ, स्वेच्छा से जुड़कर बचत, ऋण और आजीविका गतिविधियाँ संचालित करते हैं। इन समूहों का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आत्मनिर्भर बनाना, छोटी बचत को बढ़ावा देना और सामूहिक रूप से रोजगार के अवसर पैदा करना है।
