भोपालः मध्यप्रदेश में 5 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 65 लाख से अधिक महिलाएँ जुड़ी हैं, और इनमें से 12 लाख महिलाएँ “लखपति दीदी बन चुकी हैं। इन SHG समूहों ने पिछले एक वर्ष में मेलों, कंपनियों और बाज़ार नेटवर्क से 310 करोड़ रुपये का व्यापार किया है, जो ग्रामीण महिला उद्यमिता की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
2026-27 बजट में महिला एवं बाल विकास से जुड़े प्रावधानों में वृद्धि
स्व-सहायता समूहों को प्राकृतिक खेती, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, ड्रोन संचालन और ग्रामीण परिवहन जैसे क्षेत्रों से जोड़ा जा रहा है। सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए 2026-27 बजट में महिला एवं बाल विकास से जुड़े प्रावधानों में वृद्धि की है, जिससे SHG महिलाओं के प्रशिक्षण, विपणन और वित्तीय सहायता को और मजबूती मिलेगी।
आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाना उद्देश्य
स्वयं सहायता समूह ऐसे छोटे समूह होते हैं जिनमें आमतौर पर 10 से 20 लोग, विशेषकर महिलाएँ, स्वेच्छा से जुड़कर बचत, ऋण और आजीविका गतिविधियाँ संचालित करते हैं। इन समूहों का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आत्मनिर्भर बनाना, छोटी बचत को बढ़ावा देना और सामूहिक रूप से रोजगार के अवसर पैदा करना है।
स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम
स्वयं सहायता समूह के सदस्य नियमित बचत जमा करते हैं, उसी राशि से समूह के भीतर छोटे ऋण दिए जाते हैं, और – बाद में बैंक से भी वित्तीय सहायता प्राप्त की जाती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रमुख माध्यम बने हैं। मध्यप्रदेश में लाखों महिलाएँ स्वयं सहायता समूह से जुड़कर डेयरी, सिलाई, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि, हस्तशिल्प और ड्रोन संचालन जैसे कार्यों से आय अर्जित कर रही हैं।