जयभान सिंह पवैया ने आलोचना करने वालों को ‘बौद्धिक दरिद्र’ बताते हुए कहा कि सिंधिया उनके घर और गांव भी आ चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर चाय पर मुलाकात हो जाए, तो क्या “पहाड़ टूट पड़ता है?”
जयभान सिंह पवैया ने आलोचना करने वालों को ‘बौद्धिक दरिद्र’ बताते हुए कहा कि सिंधिया उनके घर और गांव भी आ चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर चाय पर मुलाकात हो जाए, तो क्या “पहाड़ टूट पड़ता है?”