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28 साल का जुल्म सड़कों पर: ‘मजदूरों की उम्मीदों की अर्थी’, सिस्टम पर बड़ा सवाल

28 साल का जुल्म सड़कों पर: ‘मजदूरों की उम्मीदों की अर्थी’, सिस्टम पर बड़ा सवाल

यह प्रदर्शन सिर्फ विरोध नहीं था, बल्कि उन सैकड़ों मजदूरों की पीड़ा की आवाज थी, जो 1998-99 में मिल बंद होने के बाद से आज तक अपनी पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य बकाया के लिए दर-दर भटक रहे हैं।