रिपोर्ट – माया सिंह
उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश मेरठ के रहने वाले सूबेदार वीरेन्द्र कुमार ने देश की सुरक्षा में तैनात रहते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी । वीरेन्द्र कुमार दुनिया के सबसे ऊंचे-ठंडे जम्मू कश्मीर के सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात थे । शहीद होने के सूचना मिलते ही उनके परिजनों में मातम छा गया । इसके साथ ही आस-पास के इलाकों में में भी सन्नाटा पसरा हुआ है ।
जानकारी के मुताबिक आज शाम साढ़े चार बजे तक उनके पार्थिव शरीर को मेरठ लाया जाएगा । बताया जा रहा है कि सेना के जवान कश्मीर से पार्थिव शरीर लाने के लिये सुबह 11:50 की फ्लाइट से रवाना हो गये हैं । दोपहर करीब 1:30 बजे दिल्ली पहुंचेंगे ,जहां शहीद वीरेन्द्र कुमार को सैन्य सलामी देने के बाद पार्थिव शरीर मेरठ लाया जाएगा और यहां भी सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा ।
दरअसल , रोटा रोड पर सरस्वती विहार कॉलोनी फेज 2 निवासी शहीद सूबेदार वीरेंद्र पिछले सात महिने से सियाचिन के ग्लेशियर पर ड्यूटी कर अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे थे । निर्धारित समय के मुताबिक अगले महिने ही वहां की ड्यूटी पूरी कर वे अपने घर मेरठ छुट्टी पर आने वाले थे । लेकिन अफसोस कि इससे पहले ही वे शहीद हो गये ।
बता दें कि शहीद वीरेन्द्र कुमार के छोटे भाई कुलदीप भई सेना में कार्यरत हैं । उनका कहना है कि 13 अप्रैल को आखिरी बार वीरेन्द्र कुमार ने अपनी पत्नी रीना शर्मा से की थी । सबकुछ सही चल रहा था , वो आराम से ड्यूटी कर रहे थे लेकिन 14 अप्रैल को अचानक शहीद होने की खबर आ गई ।
आगे उन्होंने बताया कि सूबेदार वीरेंद्र कुमार के तीन बच्चे हैं । बड़ी बेटी कशिश 14 साल की है और कक्षा 9वी में पढ़ रही है। दूसरी बेटी मुस्कान 11 साल की है और 7वीं में पढ़ रही है जबकि सबसे छोटा बेटा विवान है और वह 7 साल का है। शहीद के माता की निधन हो गई है लेकिन पिता मंगल सिंह अभी जीवित हैं । वहीं उनके साले मोनू ने बताया कि तबीयत खराब रहने के वजह से शहादत की सूचना उनकी पत्नी रीना को अभी तक नहीं दी गई है । पार्थिव शरीर का इंतजार किया जा रहा है ।
हालांकि सूबेदार विरेन्द्र की मौत किस वजह से हुई है इसका पता अभी तक नहीं चल पाया है । अनुमान लगाया जा रहा है कि ड्यूटी के समय ऑक्सीजन की कमी या अन्य परेशानी के वजह से उनकी जान गई है । जानकारी के लिये बताते चलें कि सियाचिन के ग्लेशियर पर तैनात सैनिकों की मृत्यु चाहे जिस कारण से हो , उन्हें शहीद का दर्जा ही मिलता है और बैटल कैजुअल्टी ही उनके सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज भी होती है ।