छत्तीसगढ़ की एक सामाजिक कार्यकर्त्ता सीमा ने जो करके दिखाया है वो समाज के लिए एक प्रेरणा बन गया है, अक्सर हम कहते रहते है कि एक रूपये से क्या होगा ? एक रूपये से क्या होगा ! लेकिन सिमा सरु दर्शिनी ने यही एक एक रुपया जोड़कर तीन साल में 3 लाख रुपये एकत्र कर किये और कई बच्चों की बारहवीं तक की पढाई का जिम्मा संभाल रखा हैं.
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर की रहने वाली सिमा सरु दर्शिनी ने अगस्त 2016 में ‘मुहिम एक रूपया‘ की शुरुआत की. इसके जरिये पिछले तीन साल में दो लाख रुपये एकत्रित हुए और अब तक इस अभियान के तहत 24 बच्चों की बारहवीं तक की पढाई की जिम्मेदारी ली गयी हैं.
सिमा हमेशा जरूरतमंद बच्चों के लिए कुछ करना चाहती थी और इसके लिए उन्होनें मुहिम एक रूपया की शुरुआत की. शुरूआती दिनों में आम तौर पर लोग उनकी इस मुहीम का मज़ाक बनाते थे लेकिन अब वही लोग उनकी तारीफ़ करते है।
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हालांकि ऐसा नहीं है कि उन्हें शुरुआत में ही सफलता मिल गयी थी, पहली बार तो सिर्फ 395 रूपये ही एकत्रित हुए लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होनें धीरे धीरे लोगों को जागरूक करना शुरू किया और युवाओं को भी प्रेरित किया।
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आज गरीब बच्चों की मदद का सपना जो उन्होनें देखा उसमे वो अकेली नहीं है, समाज में ऐसे कई व्यक्ति और संस्थाएं है जो अब उनकी मुहिम से जुड़ गयी है। सिमा उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो लोगों की मदद तो करना चाहते है लेकिन बस यही सोचते है की हमारे पास संसाधन नहीं है।