Home विदेश दिमागी बीमारियों के जैविक कारणों और उनके इलाज की दिशा में विज्ञानियों ने पहले ही काफी प्रगति की, हालांकि इन दवाओं को मस्तिष्क में लक्ष्य तक पहुंचाना चुनौती रही

दिमागी बीमारियों के जैविक कारणों और उनके इलाज की दिशा में विज्ञानियों ने पहले ही काफी प्रगति की, हालांकि इन दवाओं को मस्तिष्क में लक्ष्य तक पहुंचाना चुनौती रही

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वाशिंगटन: शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क विकारों के इलाज के लिए दवा आपूर्ति की एक नई तकनीक विकसित की है। उनका दावा है कि इस तरीके से दवा सीधे मस्तिष्क तक पहुंचाई जा सकती है। दवा देने का यह नया तरीका मस्तिष्क बीमारियों के उपचार में ज्यादा प्रभावी हो सकता है। इस विधि से दिमागी बीमारियों के इलाज की उम्मीद बढ़ गई है। दिमागी बीमारियों के जैविक कारणों और उनके इलाज की दिशा में विज्ञानियों ने पहले ही काफी प्रगति की है। हालांकि इन दवाओं को मस्तिष्क में लक्ष्य तक पहुंचाना चुनौती रही है। इसमें मस्तिष्क में ब्लड-ब्रेन बेरियर (बीबीबी) बड़ा बाधक रहा है।

अब शोधकर्ताओं को यह बाधा पारकर लक्ष्य तक दवाओं को पहुंचाने में सफलता मिली है। यह नया तरीका पारंपरिक तरीकों की तुलना में तीन गुना ज्यादा प्रभावी पाया गया है। साइंस एडवांस पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, शोधकर्ताओं ने सफलतापूर्वक थेरेप्यूटिक एजेंट्स सीधे मस्तिष्क तक पहुंचाने के लिए एक नैनोपार्टिकल प्लेटफार्म का निर्माण किया है। मस्तिष्क तक दवा आपूर्ति की यह प्रणाली चूहों पर आजमाई गई है।

अमेरिका के बिघम एंड वूमेंस हॉस्पिटल के शोधकर्ता नितिन जोशी ने कहा, ‘ब्लड-ब्रेन बेरियर के पार छोटे और बड़े दोनों आकार के मॉलीक्यूल थेरेप्यूटिक एजेंट्स को पहुंचाना काफी कठिन काम रहा है। हमारी प्रणाली से इसका समाधान हो सकता है।’ मस्तिष्क तक दवा पहुंचाने के इस तरीके की मदद से तंत्रिका तंत्र संबंधी कई विकारों के इलाज की राह खुल सकती है।

 

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