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तालिबान के विरुद्ध एकजुट हुए जलालाबाद के निवासी, मीनार से उतारा झंडा, आतंकियों ने बरसाईं गोलियां

तालिबानी लड़ाकों द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद अफगान लगातार हिंसा के आगोश में समाता जा रहा है, जिसे लेकर चारों तरफ गोलियों की तर्राहट गूंज रही है। आतंकी समूह देश में अब अपने हिसाब से नए परिवर्तन लागू कर रहा है। भले ही हजारों अफगान डरे हुए हैं और देश छोड़कर भागना चाहते हैं लेकिन कुछ नागरिक तालिबान के आगे झुकने के लिए तैयार नहीं है।

By: Amit ranjan 
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तालिबान के विरुद्ध एकजुट हुए जलालाबाद के निवासी, मीनार से उतारा झंडा, आतंकियों ने बरसाईं गोलियां

नई दिल्ली : तालिबानी लड़ाकों द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद अफगान लगातार हिंसा के आगोश में समाता जा रहा है, जिसे लेकर चारों तरफ गोलियों की तर्राहट गूंज रही है। आतंकी समूह देश में अब अपने हिसाब से नए परिवर्तन लागू कर रहा है। भले ही हजारों अफगान डरे हुए हैं और देश छोड़कर भागना चाहते हैं लेकिन कुछ नागरिक तालिबान के आगे झुकने के लिए तैयार नहीं है। सत्ता पर कब्जा करने के बाद तालिबान अफगानिस्तान के झंडे की जगह अपना झंडा फहरा रहा है और अफगान लगातार इस बदलाव का विरोध कर रहे हैं।

 

तालिबानी बदलाव का विरोध

तालिबान ने जगह-जगह अपने झंडे लगा दिए हैं। वहीं दूसरी तरफ तालिबान के खिलाफ फ्रंट नार्दन अलांयस ने लड़ाई छेड़ दी है। इसका गठन तालिबान से अफगानिस्तान को बचाने के लिए किया गया है। ऐसे कई वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें पब्लिक तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन करते दिख रही है। पंचशीर घाटी में फ्रंट नार्दन अलायंस ने तालिबान का झंडा निकालकर अपना झंडा फहरा दिया। ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है, जब अफगानी सैनिक फिर से एकजुट हो रहे हैं। ये वो सैनिक हैं, जो तालिबान से बचने पंजशीर घाटी में जाकर छुप गए थे। अब ये दिवंगत अफगानी पॉलिटिशियन अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद की अपील पर पंजशीर में तालिबान के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं।

अफगानिस्तान का झंडा लेकर उतरे लोग

जलालाबाद में लोग अफगानिस्तान का झंडा लेकर प्रदर्शन करते दिखाई दिए। भीड़ को तितर-बितर करने तालिबानियों ने गोलीबारी की। इसमें एक शख्स की मौत हो गई। वहीं कुछ के घायल होने की आशंका है।

 

तालिबान को टक्कर देने की तैयारी

बता दें कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में असदाबाद के स्थानीय लोगों को झंडा लेकर प्रदर्शन करते देखा जा सकता है। इससे पहले दिन में, अफगान महिलाओं के एक समूह को अपने अधिकारों की मांग करते हुए अफगानिस्तान में पहला सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन करते हुए देखा गया था। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा, काम करने का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और राजनीतिक भागीदारी के अधिकार सहित अपने अधिकारों की मांग करते हुए सुना जा सकता है।

कहा जा रहा है कि अहमद मसूद ने अमरुल्ला सालेह के साथ तालिबान से लड़ने का बीड़ा उठाया है। ये बता दें कि पंजशीर एकमात्र प्रांत है, जो तालिबान के नियंत्रण में नहीं है।

अमेरिका को तालिबान ने दी चेतावनी

अफगानिस्तान पर कब्जा कर चुके तालिबान को अभी भी अमेरिकी सेना की मौजूदगी अखर रही है। बता दें कि अपने लोगों को अफगानिस्तान से निकालने अमेरिका के करीब 10 हजार सैनिक मौजूद हैं। हाल में काबुल में हवाई अड्डे पर भगदड़ और गोलीबारी में 10 अफगानियों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को अमेरिकी सेना के मेजर जनरल हैंक टेलर ने कहा(समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक) था कि अमेरिकी सेना हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे(HKIA) की सुरक्षा अपने हाथ में लेकर रखेगी। इस पर तालिबान ने चेतावनी देकर कहा है कि अमेरिका 11 सितंबर तक अफगानिस्तान छोड़ दे।

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