नई दिल्ली : रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने सऊदी अरब की कंपनी सऊदी अरामको को अपनी तेल रिफाइनरी और पेट्रोरसायन कारोबार में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के प्रस्तावित 15 अरब डॉलर के सौदे के पुनर्मूल्यांकन की घोषणा की है। इससे पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज इस सौदे को लेकर दो बार स्व-निर्धारित समयसीमा से चूकी है।
हिस्सेदारी बिक्री के लिए बातचीत की खबर पहली बार अगस्त 2019 में आधिकारिक तौर पर सामने आई थी। इस बीच, तीन वर्षों में रिलायंस ने वैकल्पिक ऊर्जा में 10 अरब डॉलर का निवेश करके नए ऊर्जा कारोबार में प्रवेश किया। इसके मद्देनजर इस सौदे का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है।
आरआईएल ने एक बयान में कहा, ‘‘कंपनी के व्यापार पोर्टफोलियो की विकसित होती प्रकृति के कारण रिलायंस और सऊदी अरामको ने पारस्परिक रूप से यह तय किया है कि दोनों पक्षों के लिए बदले हुए संदर्भ के मद्देनजर ओ2सी (तेल से लेकर रसायन तक) व्यवसाय में प्रस्तावित निवेश का पुनर्मूल्यांकन करना फायदेमंद होगा।’’
आगे कहा “पिछले दो वर्षों के गहरे जुड़ाव ने रिलायंस और सऊदी अरामको दोनों को एक-दूसरे के बारे में अधिक समझ प्रदान की है, सहयोग के व्यापक क्षेत्रों के लिए एक मंच प्रदान किया है। सऊदी अरामको और रिलायंस एक-दूसरे के लिए लाभकारी साझेदारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और भविष्य के खुलासे उचित रूप में करेंगे।” आरआईएल और सऊदी अरामको के बीच बातचीत में अब मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी द्वारा घोषित नई स्वच्छ पहल शामिल हो सकती है।
ओ2सी कारोबार अलग करने की एप्लीकेशन ले रही वापस
रिलायंस ने यह भी कहा है कि ओ2सी कारोबार को अलग करने के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष किए गए आवेदन को वापस लिया जा रहा है। RIL ने मुंबई और अहमदाबाद में NCLT के समक्ष अपने O2C कारोबार को अलग करने का प्रस्ताव दायर किया था और पहले कहा था कि उसे 2021-22 की दूसरी तिमाही तक मंजूरी मिलने की उम्मीद है। आरआईएल ने कहा कि दोनों एंटिटीज ने कोविड प्रतिबंधों के बावजूद उचित परिश्रम की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण प्रयास किए।