नई दिल्ली : “किसानों का विरोध राजनीतिक है और किसी भी राजनेता को मंच पर माइक या स्थान नहीं दिया गया है”, ये कहना है भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत का। जिन्होंने किसान आंदोलन के शुरूआत के साथ ही कहा था कि वे किसी भी राजनीतिक पार्टी को ये मंच नहीं देंगे। अब जबकि इस आंदोलन के करीब दो महिनों से भी अधिक का समय हो गया हैं तो यह मंच सिर्फ किसान के विचार या उनकी मांगों का मंच नहीं, बल्कि उन तमाम विपक्षी पार्टियों के रोटी सेंकने का भी जरिया बन गया है, जो किसान आंदोल को भुनाने चाहते है।
आपको बता दें कि 26 जनवरी 2021 को हुए हिंसा के बाद, किसान नेता राकेश टिकैत के आंसू ने एक बड़ा किसानों का जनसैलाब लाया, जिसमें कई राजनीतिक पार्टियां भी उन्हें समर्थन देती नजर आई। किसान आंदोलन को लेकर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने राकेश टिकैत का समर्थन करते हुए कहा कि, हम पूरी तरह से किसानों के साथ हैं। आपकी माँगे वाजिब हैं। किसानों के आंदोलन को बदनाम करना, किसानों को देशद्रोही कहना और इतने दिनों से शांति से आंदोलन कर रहे किसान नेताओं पर झूठे केस करना सरासर ग़लत है।
आपको बता दे कि इससे पहले शिरोमणि अकाली दल, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक दल, समाजवादी पार्टी के अन्य नेताओं ने गाजीपुर का दौरा किया था, जो अब दो महीने से अधिक समय के लिए बीकेयू के नेतृत्व वाले प्रदर्शनकारी किसान दो महीने से अधिक समय से यहां डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारी किसान नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। इस बीच शिवसेना नेता सांसद अरविंद सावंत और संजय राउत 2 फरवरी को दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर गाजीपुर में किसानों के विरोध स्थल पर पहुंचे, जहां उन्होंने भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत से मुलाकात की।
वहीं अब राजनीतिक पार्टियों के लगातार समर्थन पर बीकेयू नेता राकेश टिकैत ने कहा कि अगर विपक्ष हमारा समर्थन करने के लिए आ रहा है तो कोई समस्या नहीं है लेकिन इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। अगर नेता आते हैं तो हम कुछ नहीं कर सकते। ट्रैफिक को आंदोलन को किसानों द्वारा अवरुद्ध नहीं किया गया है, यह पुलिस बैरिकेडिंग के कारण है। राकेश टिकैत ने 31 जनवरी को कहा था कि संयुक्त किसान मोर्चा ने नए केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में राजनीतिक दलों को अनुमति नहीं दी थी, लेकिन विरोध स्थलों पर ‘लोकतंत्र का मज़ाक उड़ाने के बाद ही’ राजनीतिक दलों से समर्थन लिया।
किसानों की मांग है कि सरकार तीनो कृषि कानून को वापस ले। उनका कहना है कि वह अपना प्रदर्शन तब तक चालू रखेंगे जब तब ये तीनों कानूनों को वापस नहीं लिया जायेगा। हालांकि, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि नए कानून किसानों के लिए बेहतर अवसर लाएंगे और कृषि में नई तकनीकों को पेश करेंगे। शुरू में किसान संगठनों ने कहा था कि उनका आंदोलन राजनीतिक नहीं है लेकिन हाल ही में उन्होंने खुले मन से नेताओं का स्वागत किया है। आपको बता दें कि देश की राजधानी दिल्ली के सभी बॉडर पर जारी किसानों का आंदोलन आज 71वें दिन में प्रवेश कर चुका है। वहीं इस आंदोलन का केन्द्र बन चुके गाजीपुर बॉर्डर धीरे-धीरे किले में तब्दील होता जा रहा है।
दिल्ली पुलिस यहां पहुंचने वाले मार्ग बंद करती जा रही है। जिससे आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, और यातायात भी काफी प्रभावित हो रहा है। प्रदर्शन स्थल पर कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए हैं और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। इसके साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा ने एलान किया है कि 6 फरवरी को 12 बजे से 3 बजे तक राष्ट्रीय और राज्य मार्गों में चक्का जाम किया जाएगा।