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राहुल द्रविड़ का वो फैंसला जिसने देश में लगा दी थी आग!

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राहुल द्रविड़ का वो फैंसला जिसने देश में लगा दी थी आग!

नई दिल्ली: द् वॉल ऑफ इंडिया भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ भारतीय टीम के एक ऐसे सितारे थे, जिनके नाम से ही विरोधी टीम में दहशत पैदा हो जाती थी। बल्लेबाजी हो या कप्तानी हो द्रविड़ की चाल विरोधी खेमे में हलचल कर देती थी। इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकतें हैं कि इनके बल्लेबाजी से विरोधी गेंदबाज पस्त हो जाते थे। ये सभी बातें हम आपको इसलिए बता रहें हैं कि सोमवार को राहुल द्रविड़ का 48वां जन्मदिन है। एक तरफ भारतीय क्रिकेट टीम की बात करें तो टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टेस्ट सीरीज खेल रही है, लेकिन हालात टीम के विपरीत हो गयें हैं। जिससे राहुल द्रविड़ की कमीं आज भी खल रही है।

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द्रविड़ का जीवन विवादों से भी घिरा रहा है, वक्त था साल 2004 का भारतीय टीम पाकिस्तान के दौरे पर गई थी। उस दौर में विरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर टेस्ट मैच में भी आक्रामक होकर बल्लेबाजी करते थे। भारतीय टीम ने पाकिस्तानी  सरजमीं पर टेस्ट सीरीज का आगाज किया। पहला टेस्ट मैच मुल्तान में खेला गया, जिसमें विरेंद्र सहवाग ने 302 रनों की आतिशी पारी खेल दी। वहीं सचिन ने भी इस पारी में शानदार शतक जड़ा, सचिन इस पारी में दोहरा शतक जड़ने से चूक गये। सचिन के दोहरा शतक से चूकने का करण बनें द्रविड़, दरअसल सचिन194 रनों पर थे, तभी कप्तान राहुल द्रविड़ ने पारी घोषित कर दी। द्रविड़ का ये फैंसला पूरे देश में आग की तरह फैल गया।

द्रविड़ के पारी घोषित करने के निर्णय को कुछ क्रिकेटरों ने  सही ठहराया तो कुछ ने आलोचना की। इस फैंसले ने द्रविड़ के जीवन पर काफी विपरीत असर डाला। संजय मांजरेकर जैसे खिलाड़ियो ने द्रविड़ की तारीफ करते हुए साहसिक कदम बताया तो वहीं सचिन के प्रसंसको ने द्रविड़ के इस फैंसले को गलत करार दिया।

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इसी ऑस्ट्रेलिया की सरजमीं पर साल 2007-2008 के दौरान भारतीय टीम टेस्ट सीरीज खेलने गई थी। भारतीय टीम ने चार टेस्ट मैच खेले थे। जिसमें से दूसरा टेस्ट मैच राहुल द्रविड़ के लिए जाना जाता है। मैच था सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पहली पारी में 463 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था। भारतीय टीम की तरफ से सलामीं बल्लेबाजी की जिम्मेदारी वसीम जाफर और राहुल द्रविड़ के कंधो पर डाल दी गई। पारी शुरु ही हुई थी, कि सातवें ओवर में वसीम जाफर 3 रन बनाकर चलते बनें। वसीम जाफर के सस्ते में आउट होने के बाद दबाव द्रविड़ के ऊपर आ गया। द्रविड़ का साथ देने नंबर तीन पर वीवीएस लक्ष्मण आये। दोनो बल्लेबाजों ने परिस्थिति को देखते हुए स्लो खेलने का फैंसला किया और पूरा दिन बल्लेबाजी किये। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने दोनो बल्लेबाजों को आउट करने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं हो पाये।

राहुल द्रविड़ ने उस दिन 40 बॉल डॉट खेलने के बाद 41वीं गेंद पर सिंगल लिया, द्रविड़ की ये बल्लेबाजी और डिफेंस रणनीति को देखकर दर्शक दीर्घा में मौजूद दर्शकों ने खड़े होकर ताली बजाते हुए उनके खेलने के अंदाज का स्वागत किया था। द्रविड़ ने अपनी इस पारी में 53 रनों की पारी खेली थी, इस दौरान उन्होने 160 गेंदो का सामना किया था। द्रविड़ ने अपने इस पारी में लगभग 240 मिनट तकरीबन 4 घंटे बल्लेबाजी की थी। आपको बता दें कि भारतीय टीम ने भले ही ये टेस्ट मैच गंवा दी थी। लेकिन द्रविड़ ने अपने इस बल्लेबाजी से दर्शकों का दिल जीत लिया था। मौजूदा परिस्थिति की बात करें तो भारतीय टीम को द्रविड़ की इस पारी से सबक लेकर टीम को मझधार से निकालने की कोशिश करनी चाहिए।

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