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India-China Relation : SCO शिखर सम्मेलन में सकारात्मक बातचीत,भारत-चीन संबंध पर बोले वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री

India-China Relation : भारत-चीन संबंधों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, सीमा मुद्दों के समाधान के साथ तनाव कम होने की उम्मीद है।SCO समिट में पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने व्यापार और निवेश संबंध बढ़ाने पर सहमति जताई।पीयूष गोयल ने कहा कि सीमा विवाद सुलझते ही रिश्ते स्वाभाविक रूप से सामान्य हो जाएंगे।

By: RNI Hindi Desk 
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India-China Relation : SCO शिखर सम्मेलन में सकारात्मक बातचीत,भारत-चीन संबंध पर बोले वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और चीन के संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं और सीमा विवादों के समाधान के साथ तनाव कम होने की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को बताया कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच सकारात्मक चर्चा हुई। इस मुलाकात में दोनों देशों ने सीमा विवाद का निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने पर सहमति जताई।

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और चीन दोनों वैश्विक व्यापार को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए, दोनों देशों ने आपसी व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने SCO सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और अन्य वैश्विक नेताओं की मौजूदगी में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को मानवता का कर्तव्य बताया।

पत्रकारों ने जब मंत्री गोयल से पूछा कि क्या अब प्रेस नोट 3 (PN3) नीति में ढील की संभावना है, तो उन्होंने कहा कि SCO एक बहुपक्षीय मंच है, जहां सभी सदस्य देशों ने भाग लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन के साथ सीमा विवादों के समाधान के बाद ही संबंधों का सामान्य होना स्वाभाविक है।

गौरतलब है कि अप्रैल 2020 में जारी प्रेस नोट 3 के तहत चीन सहित उन सभी देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए भारत सरकार की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य किया गया था, जो भारत से भूमि सीमा साझा करते हैं। यह कदम गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद उठाया गया था, जब दोनों देशों के संबंधों में तल्खी आई थी।

गोयल ने विश्वास जताया कि धीरे-धीरे सीमा मुद्दों का समाधान होगा और भारत-चीन संबंध नई दिशा में आगे बढ़ेंगे, जिससे आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई ऊर्जा मिलेगी।

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