दिल्ली में आयोजित एम.एस. स्वामीनाथन शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के टैरिफ वॉर के बीच किसानों के हित में बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भारत अपने किसानों, मछुआरों और डेयरी उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे इसकी कितनी भी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। पीएम मोदी ने कहा, “हमारे लिए किसानों का हित सर्वोपरि है, और हम इसके लिए किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार हैं।”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती पर होने वाले खर्च को कम करने और नए आय स्रोत विकसित करने के लक्ष्य पर लगातार काम कर रही है। सरकार की नीतियां सिर्फ सहायता देने तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने किसानों में आत्मविश्वास और भविष्य को लेकर भरोसा जगाया है।
दरअसल, अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता के दौरान अमेरिका चाहता था कि भारत अपने कृषि और डेयरी बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोल दे। इसमें उच्च टैरिफ (20-100%) और गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने की मांग शामिल थी, जिससे अमेरिकी सेब, बादाम, अखरोट, और जीएम फसलें जैसे सोयाबीन और मक्का भारत में बेधड़क आ सकें। यह भारतीय किसानों के लिए प्रतिकूल साबित हो सकता था, विशेषकर छोटे और मझोले किसानों के लिए।
पीएम मोदी के इस स्पष्ट रुख से यह संकेत गया है कि भारत कृषि आत्मनिर्भरता और किसानों के हितों से समझौता नहीं करेगा, चाहे वैश्विक व्यापारिक दबाव कुछ भी हो।