मोबाइल, टैबलेट जैसे डिवाइस को EMI पर खरीदने वाले ग्राहकों के लिए RBI के प्रस्तावित नए नियम अहम हैं। ड्राफ्ट के मुताबिक बैंक किसी ग्राहक के मोबाइल या टैबलेट को लोन रिकवरी के लिए तभी प्रतिबंधित कर सकेगा, जब उसी डिवाइस की खरीद के लिए संबंधित बैंक ने लोन दिया हो और लोन एग्रीमेंट में इस तरह की कार्रवाई की स्पष्ट अनुमति हो।
RBI के प्रस्तावित फ्रेमवर्क में EMI चूकते ही डिवाइस को तुरंत लॉक करने की अनुमति नहीं होगी। अगर लोन 60 दिन तक बकाया हो जाता है, तो पहले ग्राहक को नोटिस देना होगा और डिफॉल्ट सुधारने के लिए कम से कम 21 दिन का समय देना होगा। इसके बाद दूसरा नोटिस देकर कम से कम 7 दिन का अतिरिक्त अवसर देना होगा। इस प्रक्रिया के बाद ही, यानी डिफॉल्ट के 90 दिन तक पहुंचने पर, निर्धारित शर्तों के तहत डिवाइस के कुछ फीचर्स को प्रतिबंधित करने की कार्रवाई की जा सकेगी।
डिवाइस पर प्रतिबंध लगाने की स्थिति में भी कुछ जरूरी सुविधाओं को बंद नहीं किया जा सकेगा। प्रस्ताव के अनुसार इंटरनेट, इनकमिंग कॉल, इमरजेंसी SOS और सरकारी या पब्लिक सेफ्टी अलर्ट जैसी आवश्यक सेवाएं चालू रखनी होंगी।
अगर किसी ग्राहक ने पर्सनल लोन, होम लोन, कार लोन या किसी दूसरे उद्देश्य के लिए कर्ज लिया है, तो उस लोन की रिकवरी के लिए उसके मोबाइल या टैबलेट को रिमोटली प्रतिबंधित नहीं किया जा सकेगा। यह प्रस्ताव केवल उस डिवाइस की फाइनेंसिंग से जुड़े लोन पर लागू होता है।

प्रस्तावित नियमों में यह भी कहा गया है कि बकाया राशि चुकाने या डिफॉल्ट ठीक होने के बाद डिवाइस की प्रतिबंधित सुविधाओं को एक घंटे के भीतर बहाल करना होगा। देरी की स्थिति में ग्राहक को प्रति घंटे 250 रुपये के हिसाब से मुआवजे का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
डिवाइस प्रतिबंध की प्रक्रिया के दौरान बैंक या लोन देने वाली संस्था को ग्राहक के मोबाइल में मौजूद निजी डेटा तक पहुंचने, उसे हासिल करने या अपने पास रखने की अनुमति नहीं होगी। इसका उद्देश्य लोन रिकवरी के साथ ग्राहक की निजता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि ये प्रावधान मई 2026 में जारी RBI के संशोधित ड्राफ्ट का हिस्सा हैं। इस पर सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई थीं, इसलिए इसे वर्तमान में लागू अंतिम नियम के तौर पर पेश नहीं किया जाना चाहिए।