1. हिन्दी समाचार
  2. दिल्ली
  3. पाकिस्तान को अमेरिकी ड्रोन कंपनी Powerus से मिला ड्रोन ऑर्डर, भारत के लिए क्यों अहम है यह डील

पाकिस्तान को अमेरिकी ड्रोन कंपनी Powerus से मिला ड्रोन ऑर्डर, भारत के लिए क्यों अहम है यह डील

अमेरिकी डिफेंस टेक कंपनी Powerus ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय से अनमैन्ड एरियल सिस्टम और सपोर्ट का शुरुआती ऑर्डर मिलने की जानकारी दी है। दोनों पक्षों ने भविष्य में unmanned और autonomous defence technology में सहयोग के लिए MoU भी किया है। ऑर्डर की संख्या और कीमत अभी सार्वजनिक नहीं है, इसलिए इसके सैन्य प्रभाव का आकलन फिलहाल सीमित है।

By: Nivedita 
Updated:
पाकिस्तान को अमेरिकी ड्रोन कंपनी Powerus से मिला ड्रोन ऑर्डर, भारत के लिए क्यों अहम है यह डील

नई दिल्ली। पाकिस्तान और अमेरिका के रक्षा संबंधों में ड्रोन तकनीक से जुड़ा एक नया घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी Powerus ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय से अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) और उससे संबंधित सपोर्ट के लिए शुरुआती ऑर्डर मिलने की जानकारी दी है। इसके साथ दोनों पक्षों ने अनमैन्ड और ऑटोनॉमस डिफेंस टेक्नोलॉजी में संभावित सहयोग के लिए एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU) भी किया है।

रावलपिंडी में आसिम मुनीर से हुई Powerus प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात

16 सितंबर 2026 को Powerus के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच के नेतृत्व में कंपनी के प्रतिनिधिमंडल ने रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर में पाकिस्तान के सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, बैठक में रक्षा तकनीक के बदलते स्वरूप, रक्षा उपकरणों की खरीद, उत्पादन और क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

 

पाकिस्तान को अमेरिकी ड्रोन कंपनी Powerus से मिला ड्रोन ऑर्डर, भारत के लिए क्यों अहम है यह डील

शुरुआती ऑर्डर की रकम और ड्रोन की संख्या अभी सामने नहीं आई

Powerus के मुताबिक पाकिस्तान को मिला शुरुआती ऑर्डर अनमैन्ड एरियल सिस्टम और उससे जुड़े सपोर्ट से संबंधित है। हालांकि कंपनी ने सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देते हुए यह नहीं बताया है कि पाकिस्तान कितने सिस्टम खरीदेगा और इस ऑर्डर की कुल कीमत कितनी है। इसलिए फिलहाल पाकिस्तान की सैन्य क्षमता पर इस सौदे के सटीक प्रभाव का आकलन उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर करना सीमित है।

MoU में भविष्य के तकनीकी सहयोग की संभावना

इस समझौते का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू रणनीतिक MoU है। Powerus के अनुसार, MoU अनमैन्ड और ऑटोनॉमस डिफेंस सिस्टम के क्षेत्र में आगे सहयोग के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करता है। हालांकि यह MoU अपने आप में किसी भविष्य की खरीद की बाध्यता नहीं बनाता। आगे होने वाली किसी भी खरीद या कार्यक्रम के लिए अलग समझौते और संबंधित अमेरिकी कानूनों एवं सरकारी मंजूरियों की जरूरत होगी।

 

Powerus और Trump परिवार का क्या कनेक्शन है?

इस डील की चर्चा में Powerus का प्रस्तावित कॉरपोरेट मर्जर भी महत्वपूर्ण है। Powerus और Aureus Greenway Holdings के बीच प्रस्तावित बिजनेस कॉम्बिनेशन में Donald Trump Jr. और Eric Trump से जुड़े निवेश शामिल हैं। अमेरिकी SEC में दाखिल दस्तावेजों में दोनों को संयुक्त कंपनी के उल्लेखनीय निवेशकों में शामिल बताया गया है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार Trump परिवार के निवेश को Powerus के पाकिस्तान के साथ हुए इस रक्षा समझौते की प्रत्यक्ष बातचीत या रोजमर्रा के संचालन से जोड़ने वाली जानकारी सामने नहीं आई है। Reuters ने भी रिपोर्ट किया है कि Trump Jr. और Eric Trump को निष्क्रिय निवेशक के तौर पर वर्णित किया गया है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?

भारत के नजरिए से इस घटनाक्रम का एक प्रमुख पहलू पाकिस्तान की unmanned warfare capability है। आधुनिक सैन्य अभियानों में ड्रोन और अन्य unmanned systems का इस्तेमाल निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, लक्ष्य की पहचान और विभिन्न मिशन सपोर्ट जैसे कार्यों में किया जाता है। यदि भविष्य में Powerus और पाकिस्तान के बीच तकनीकी सहयोग या स्थानीय उत्पादन से जुड़े समझौते आगे बढ़ते हैं, तो इससे पाकिस्तान के unmanned systems से जुड़े औद्योगिक और तकनीकी ढांचे में बदलाव आ सकता है। हालांकि मौजूदा शुरुआती ऑर्डर की वास्तविक क्षमता और दायरा सार्वजनिक नहीं है, इसलिए इसके सैन्य प्रभाव को लेकर फिलहाल निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

इसे सिर्फ ड्रोन खरीद का सौदा मानना पर्याप्त नहीं

Powerus-पाकिस्तान समझौते में शुरुआती UAS ऑर्डर के साथ भविष्य के सहयोग के लिए MoU भी शामिल है। यही वजह है कि इस घटनाक्रम को केवल एक सीमित ड्रोन खरीद के बजाय संभावित दीर्घकालिक तकनीकी सहयोग के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। फिलहाल सबसे अहम सवाल यही हैं कि पाकिस्तान को कौन से सिस्टम मिलते हैं, उनकी क्षमताएं क्या होंगी, ऑर्डर का वास्तविक आकार कितना है और क्या दोनों देश आगे चलकर स्थानीय उत्पादन या संयुक्त तकनीकी परियोजनाओं तक पहुंचते हैं। इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही इस समझौते के व्यापक रणनीतिक प्रभाव का अधिक स्पष्ट आकलन किया जा सकेगा।

 

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...