अमरकंटक(अनूपपुर) : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अमरकंटक में स्व. भगवत शरण माथुर की जयंती के अवसर पर आयोजित ‘विचार गोष्ठी एवं श्रद्धांजलि समारोह’ में शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मां नर्मदा और बाबा महादेव की कृपा से यह अमरकंटक का यह क्षेत्र नर्मदा, सोन, जोहिला यह तीनों त्रिवेणी की धारा है।

जिस अमरकंटक की इस भावना के साथ कई राज्यों के जीवन रेखा के रूप में मां नर्मदा की धारा अपना आशीर्वाद लुटाती है और सोन भी यहां से आगे बढ़ते हुए गंगा की धारा को समृद्ध करती है। यह सिद्ध क्षेत्र जिसकी कोख से मां नर्मदा, सोन और जोहिला प्रकट होती हैं। उन्होंने कहा कि परमात्मा ने जब सृष्टि रची तब इस क्षेत्र को विशेष आशीर्वाद मिला। जिसके बलबूते पर हजारों हजार लाखों साल से है। जब से यह सृष्टि है तब से यह अमरकंटक अमर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पुण्य धरा जिसके लिए मैं अपनी ओर से हमारे परमपूज्य भगवत शरण माथुर को स्मरण करता हूं। वैसे तो वे मूलतह राजगढ़ के रहने वाले थे, लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक और भाजपा के संगठन मंत्री बनने के बाद हमारे कई सारे प्रचारकों ने अपने जीवनकाल में प्रचारक का जो दायित्व है वह भी करते करते समाज सेवा की दृष्टि से कई कामों को हाथ में लिया। इस मौके पर उन्होंने स्व. अनिल दवे जी को भी स्मरण किया। जिनके माध्यम से नर्मदा समग्र के बलबूते पर नर्मदा जी की धारा अविरल प्रभाहित होती रही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण, प्रदूषण, बदलता जलवायु परिवर्तन ऐसे सारे विषयों को लेकर अनिल जी ने राजनीतिक क्षेत्र में रहते हुए भी इस बात पर भी विचार किया। हम इनके साथ नर्मदा समग्र के भाव को भी लेकर आए हैं। उज्जैन में जब जिला प्रचारक थे तब का मैं स्वयं सेवक भी हूं। उनसे तब का मिलना जुलना है। माथुर साहब को असंभव से असंभव काम भी मिले तो वे उसे संभव बना देते हैं। उन्होंने कहा कि मैं कई कांग्रेस के नेताओं को जानता हूं जिनके दरवाजे के बाहर अगर संघ के स्वयं सेवकों का पथसंचलन निकलता है तो उनकी प्रेरणा से तत्कालीन उज्जैन के महापौर हो, उप महापौर हो, कांग्रेस के अध्यक्ष हो राष्ट्रभक्तों के ऊपर पुष्प वर्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि अभी दो-तीन बार से ऐसा हुआ है कि हमारा जो समृद्ध क्षेत्र था मालवा विंध्य क्षेत्र आगे बढ़ गया। यह माथुर साहब की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि माथुर साहब अब नहीं है लेकिन उन्होंने जो मार्ग दिखाया है, उस मार्ग पर चलने लिए हम सब सरकार के माध्यम से उस भाव को प्रकट करने आए हैं कि माथुर साहब ने संकल्प लिया कि अमरकंटक हराभरा होना चाहिए, मां नर्मदा की धारा अविरल होनी चाहिए, इसके दोनों किनारों पर सघन वृक्षारोपण होना चाहिए। तमाम प्रकार के अतिक्रमण और दूसरी प्रकार की कठिनाइयों से बचाकर के मां नर्मदा का आशीर्वाद युगों युगों तक मिलता रहे यह सब संकल्प करने हम यहां आए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का यह शताब्दी वर्ष भी चल रहा है। ऐसे में पांच आयामों के बलबूते के आधार पर परिवार को संस्कारित करना, समाज को सामाजिक समसरता को बढ़ावा देना, पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को अपनाना और नागरिक कर्तव्यों का इमानदारी से पालन करना। इन पांच परिवर्तनों के आधार पर संघ ने अपनी बैचारिक प्रतिबद्धता के बलबूते पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया। वैसे भी कल डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती है। इसकी पूर्व संध्या पर बधाई देते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि बाबा साहब के माध्यम से जो उन्होंने अपने जीवनभर अपने मूल सिद्धांतों के साथ हमारे हिंदू समाज की विविधताओं के साथ जो जातिगत बुराइयां थी उससे बाहर लाते हुए कमजोर से कमजोर व्यक्ति के बीच में भी समता और समानता का भाव हो। लगभग एक हजार साल की गुलामी का दौर भारत का रहा है ऐसे में जब देश को जो आजादी मिली है तो यह अक्षुण रहनी चाहिए। लंबे समय तक भारत के लोग उस स्वाधीनता को गले लगाकर दुनिया के सामने भारत की सनातन संस्कृति की धवल धारा को दुनिया के सामने प्रकट करते हुए मानवता के मूल गुणों को स्थापित करने के लिए आगे बढ़ते रहे। इसलिए हम में से सबके लिए हमारे समाज में छुआछूत का कोई स्थान नहीं जाति वाद का कोई स्थान नहीं, हर वर्ग के साथ आगे बढ़ते जाना है। परिवार की ताकत बच्चे बूढ़े जवान सब मिलकर परिवार का भाव बनाएं। और परिवार के भाव में अंदर की आत्मीयता को बनाएं। ऐसा मौका होना चाहिए कि परिवार के लोग एक समय एक साथ भोजन करें।
डॉ. यादव ने कहा कि आज भौतिकता के माहौल में परिवार के अंदर पीढ़ियों में परंपराएं बदल रही है, संस्कारों का अभाव हो रहा है। राष्ट्रप्रेम की भावना इसी कारण से प्रभावित होता है इसलिए आज के इस दौर में हम सब अपने परिवार के साथ बैठें। साथ भोजन करें बच्चों को महापुरुषों के किस्से सुनाएं, राष्ट्रभक्ति की धारा के साथ जोड़कर राष्ट्र निर्माण की पीढ़ी बनाएं इस बात की आवश्यकता है। साथ ही पर्यावरण को लेकर भी प्लास्टिक, पेस्टीसाइज जैसी कई चुनौतियां हमारे सामने हैं। जिससे हमारी समूची पृथ्वी पर संकट आया है। ऐसे में हमे वापस प्रकृति के साथ जुड़ना पड़ेगा। प्रकृति से जुड़ने की हमारी परंपरा तो सनातन काल से है। अच्छा लगता है जब हमारे अतिथियों का स्वागत तुलसी के पौधों से किया जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया कि जिन्होंने सरकार बनाते समय ही यह देख लिया था कि हमारे देश में रिफाइनरियां होनी चाहिए, पैट्रोल डीजल का पर्याप्त भंडारण होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश आने वाली चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए तैयार रहना चाहिए। इसलिए सब तरह से देश को महफूज रखते हुए समाज को संगठित करते हुए सेना को सशक्त करते हुए मोदी जी ने देश को समय से पहले सावधान किया। इसलिए आज पूरी दुनिया के अंदर उथल पुथल है लेकिन हमारा देश ताकत के साथ खड़ा है। इसलिए हमें मोदी जी की सरकार पर गर्व है। परिवर्तन के इस दौर में हमे अपने उस संस्कारों के साथ विरासत से विकास की तरफ भी बढ़ना पड़ेगा। गौशाला को अनुदान चालू करने और प्रवचन के लिए भवन देने की घोषणा की।