भारत ने अमेरिकी प्रशासन की धमकियों और टैरिफ के बावजूद रूस से तेल खरीदना जारी रखा है। दिल्ली इसे अपनी निष्पक्ष और रणनीतिक विदेश नीति का हिस्सा बताती रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत जल्द ही रूस से तेल की खरीद बंद कर देगा। ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक मीडिया में हलचल मचा दी। हालांकि, भारत सरकार ने इस आश्वासन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और रूस से तेल खरीदने पर अपना रुख बरकरार रखा है।
अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। इसके बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया और इसे अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की नीति का हिस्सा बताया। अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच रूस से तेल आयात में लगभग 8.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन सितंबर में भारत ने रूस से हर दिन 45 लाख बैरल तेल खरीदा। इसी अवधि में रूस से आयातित तेल का कुल मूल्य लगभग ₹25,597 करोड़ रहा। इसके बावजूद भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार बना हुआ है।
इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मोदी, ट्रंप के दबाव में आ गए हैं और रूस से तेल खरीदने के पीछे की वास्तविक स्थिति जनता और संसद से छुपाई जा रही है। राहुल ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे को लेकर प्रधानमंत्री की चुप्पी को आलोचना का विषय बनाया और भारतीय विदेश नीति की विफलता पर सवाल उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर और भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर सरकार की स्थिति अस्पष्ट रही।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी ट्रंप के दावे को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के फैसलों की घोषणा अमेरिका में हो रही है, जबकि भारत पर टैरिफ और व्यापारिक दबाव लगातार बनाए जा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि रूस से तेल खरीदने और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर संसद को जानकारी दी जाए।
विपक्ष ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर भी सरकार पर हमला बोला। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी के भारत दौरे के दौरान महिला पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस में एंट्री नहीं मिलने को लेकर राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री की चुप्पी महिलाओं के अधिकारों के प्रति उनकी कमजोरी को दर्शाती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के भेदभाव से नारी शक्ति के नारों की खोखलापन उजागर होता है।
इस मामले पर, भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक बाजार में स्थिरता को ध्यान में रखते हुए रूस से तेल खरीद जारी रख रहा है। अमेरिकी टैरिफ और दबाव के बावजूद भारत ने इसे रणनीतिक निर्णय बताया है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार में संतुलन बनाए रखने के लिए अहम है।