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NSA डोभाल का नेताजी पर लेक्चर, बोले- दुस्साहस से भरा था बोस का जीवन

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने दिल्‍ली में नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेमोरियल लेक्‍चर में भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने बोस की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए उन्हें सभी नेताओं से अलग बताया। उन्होंने नेताजी को याद करते हुए कहा कि पूर्ण स्वतंत्र व्यक्ति आकाश में उड़ते पक्षियों जैसा महसूस करता है। इसलिए सुभाष चंद्र बोस चाहते थे कि पक्षियों की तरह भारतीय भी खुद को आजाद महसूस करें। इस तरह की स्वतंत्रता मिले। सुभाष दयालु प्रवृति के व्यक्ति थे लेकिन उनमें दुस्साहस भरा पड़ा था।

By: RNI Hindi Desk 
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NSA डोभाल का नेताजी पर लेक्चर, बोले- दुस्साहस से भरा था बोस का जीवन

नई दिल्‍ली: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने दिल्‍ली में नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेमोरियल लेक्‍चर में भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने बोस की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए उन्हें सभी नेताओं से अलग बताया। उन्होंने नेताजी को याद करते हुए कहा कि पूर्ण स्वतंत्र व्यक्ति आकाश में उड़ते पक्षियों जैसा महसूस करता है। इसलिए सुभाष चंद्र बोस चाहते थे कि पक्षियों की तरह भारतीय भी खुद को आजाद महसूस करें। इस तरह की स्वतंत्रता मिले। उन्होंने देश की आजादी से कम किसी चीज के लिए कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि नेताजी न केवल इस देश को राजनीतिक गुलामी से मुक्त करना चाहते हैं, बल्कि लोगों की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मानसिकता को बदलना चाहते थे। NSA डोभाल ने कहा कि बोस में वह प्रतिभा थी जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। अब तक कोई नेता नहीं है जो शायद वास्तविक रूप से उनकी बराबरी कर सके। वह ICS में जाते हैं, उसे छोड़कर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बन जाते हैं। फिर 41 की उम्र में उसे भी छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि नेताजी के दो गुण दूसरे लोगों से उन्हें अलग करते हैं। सुभाष दयालु प्रवृति के व्यक्ति थे लेकिन उनमें दुस्साहस भरा पड़ा था।

 

डोभाल ने उनके इसी दुस्साहस के बारे में बताया कि जब वह प्रेसीडेंसी कॉलेज में थे तब उन्‍हें लगा कि ब्रिटिश की मदद ली जा सकती है। उनके पास लंदन जाने, आईसीएस की परीक्षा देने का दुस्साहस था। वहीं जब उनसे पूछा गया कि आपका सबसे बड़ा विचार क्या होगा, तो वे कहते हैं, मेरा राष्ट्रवाद। इसके बाद उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया और वापस आ गए। अजीत डोभाल ने आगे कहा कि उनमें गांधी को चुनौती देने का दुस्साहस था। गांधी उस समय राजनीतिक के शिखर पर थे। कांग्रेस अध्‍यक्ष बनने के लिए गांधी ने पट्टाभि सीतारमैया का समर्थन किया। जबकि सुभाष चंद्र के पास भी भारी समर्थन था लेकिन उन्‍होंने त्यागपत्र दे दिया। क्योंकि उनके मन में गांधी के प्रति अगाध श्रद्धा थी। इसलिए सुभाष चंद्र बोस ने गांधी से कहा कि मैं आपका सम्मान करता हूं। इसलिए आपके रास्ते में नहीं खड़ा हूं। त्यागपत्र देने के बाद बाहर निकलते ही उन्होंने नए सिरे से संघर्ष की बिगुल बजाया। हालांकि इसके बाद उन्हें जेल हो गई और नजरबंद रहते हुए उन्होंने भारत से भाग जाने का फैसला किया। हालांकि यह एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के लिए इतना आसान नहीं था जो अपनी क्षमता, साहस और विश्वास के अलावा किसी और पर निर्भर नहीं रह सकता है उसे अफगानी पोशाक में भागना काफी मुश्किल था। एनएसए अजीत डोभाल ने कहा कि अगर नेताजी सुभाष चंद्र बोस जिंदा होते तो भारत का कभी बंटवारा नहीं होता। उन्होंने कहा कि इतिहास नेताजी के प्रति निर्दयी रहा है, मुझे बहुत खुशी है कि प्रधानमंत्री मोदी इसे फिर से उनसे जुड़े इतिहास को पुनर्जीवित करने के इच्छुक हैं।

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