देश में एक खास ₹250 का स्मारक सिक्का जारी किया गया है, जिसने लोगों और सिक्कों का संग्रह करने वाले शौकीनों का ध्यान आकर्षित किया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 3 नवंबर 2026 को वाराणसी में इस विशेष सिक्के का अनावरण किया। यह सिक्का कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के महान संगीतकार मुथुस्वामी दीक्षितार की 250वीं जयंती के अवसर पर जारी किया गया है। इस कार्यक्रम का आयोजन आईआईटी (BHU), वाराणसी में किया गया। सिक्के के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में मुथुस्वामी दीक्षितार के योगदान को सम्मान दिया गया है।
यह विशेष सिक्का दक्षिण भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध रचनाकार मुथुस्वामी दीक्षितार की स्मृति में जारी किया गया है। उनका जन्म वर्ष 1775 में हुआ था। उन्हें कर्नाटक संगीत की महान त्रिमूर्ति के प्रमुख सदस्यों में गिना जाता है। इस त्रिमूर्ति में मुथुस्वामी दीक्षितार के साथ त्यागराज और श्यामा शास्त्री का नाम भी शामिल है। मुथुस्वामी दीक्षितार एक कुशल संगीतकार, गायक, रचनाकार और वीणा वादक थे। उनकी रचनाओं में भारतीय दर्शन, आध्यात्मिकता, संस्कृत साहित्य और संगीत की जटिल शैलियों का अनूठा मेल देखने को मिलता है। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में नवग्रह कृतियां और कमलाम्बा नवावरणम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। माना जाता है कि उन्होंने लगभग 450 से 500 संगीत रचनाएं तैयार की थीं। आज भी उनकी रचनाएं कर्नाटक संगीत की प्रस्तुतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
यह सिक्का अपनी बनावट और धातुओं के अनूठे मिश्रण के कारण खास है। इसे चार अलग-अलग धातुओं को मिलाकर तैयार किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
सिक्के में चांदी की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी इसे विशेष संग्रहणीय महत्व देती है। वहीं तांबा, निकेल और जस्ता इसकी मिश्रधातु का हिस्सा हैं।
इस सिक्के को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इसका इस्तेमाल बाजार में खरीदारी या अन्य सामान्य लेन-देन के लिए किया जा सकता है? इसका जवाब है नहीं। यह सामान्य प्रचलन वाली मुद्रा नहीं, बल्कि एक स्मारक सिक्का है। इसे विशेष अवसर और महान व्यक्तित्व की स्मृति को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसलिए दुकानों पर भुगतान करने या रोजमर्रा के लेन-देन में इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसका मुख्य उद्देश्य सिक्का संग्रह करने वालों और भारतीय सांस्कृतिक विरासत में रुचि रखने वाले लोगों को एक विशेष यादगार उपलब्ध कराना है।
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इस सिक्के की एक और खास बात इसकी बिक्री कीमत है। शुरुआती उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इंडिया गवर्नमेंट मिंट की वेबसाइट पर इसकी कीमत 6,985 रुपये दर्ज की गई थी। ध्यान देने वाली बात यह है कि 250 रुपये इसका अंकित मूल्य है, जबकि 6,985 रुपये इसकी संग्रहणीय बिक्री कीमत है। दोनों अलग-अलग हैं। इच्छुक लोग इसकी उपलब्धता और खरीद से संबंधित जानकारी इंडिया गवर्नमेंट मिंट की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं। सीमित संख्या में जारी होने के कारण इसकी उपलब्धता समय के साथ बदल सकती है।
इस स्मारक सिक्के का अनावरण वाराणसी स्थित आईआईटी-बीएचयू में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान किया गया। कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुथुस्वामी दीक्षितार के संगीत और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में उनके योगदान को याद किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद भी किया और भारतीय शास्त्रीय संगीत, विभिन्न वाद्ययंत्रों तथा उनकी विशेषताओं के बारे में जानकारी साझा की। कार्यक्रम में कर्नाटक संगीत की प्रसिद्ध गायिका डॉ. सुमित्रा वासुदेव ने संगीतमय प्रस्तुति दी। इसके अलावा वीणा वादन के माध्यम से भी महान संगीतकार को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वित्त मंत्री ने भारतीय संगीत और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मुथुस्वामी दीक्षितार की 250वीं जयंती पर जारी किया गया यह सिक्का केवल एक संग्रहणीय वस्तु नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा का प्रतीक भी है। इसके जरिए देश की महान संगीत विभूतियों और उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। 35 ग्राम वजन और चार धातुओं से निर्मित यह विशेष सिक्का उन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है, जिन्हें दुर्लभ सिक्कों, भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी वस्तुओं का संग्रह करना पसंद है।