1. हिन्दी समाचार
  2. विदेश
  3. चीन के कब्जे वाली जमीन की जांच के लिए नेपाल की देउबा सरकार ने गठित की हाईलेवल कमेटी, करेगी अध्ययन

चीन के कब्जे वाली जमीन की जांच के लिए नेपाल की देउबा सरकार ने गठित की हाईलेवल कमेटी, करेगी अध्ययन

नेपाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही चीन और नेपाल के संबंध में खटास नजर आ रहा है। जिससे चीन को तगड़ा झटका लग सकता है। आपको बता दें कि नेपाल की देउबा सरकार ने चीन के कब्जे वाली जमीन की जांच के लिए एक हाईलेवल कमेटी के गठन का ऐलान किया है।

By Amit ranjan 
Updated Date

नई दिल्ली : नेपाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही चीन और नेपाल के संबंध में खटास नजर आ रहा है। जिससे चीन को तगड़ा झटका लग सकता है। आपको बता दें कि नेपाल की देउबा सरकार ने चीन के कब्जे वाली जमीन की जांच के लिए एक हाईलेवल कमेटी के गठन का ऐलान किया है। यह कमेटी चीन के साथ सभी सीमा मुद्दों को लेकर अपनी रिपोर्ट देउबा सरकार को सौंपेगी।

आपको बता दें कि इस कमेटी को बनाने का फैसला प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के बालूवतार स्थित सरकारी आवास पर हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया। बता दें कि पिछले साल भारत के साथ गलवान में हुई सैन्य झड़प के तुरंत बाद चीन ने नेपाल के हुमला में करीब 150 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा कर लिया था।

विवादित इलाके का अध्ययन करेगी कमेटी

नेपाल सरकार के प्रवक्ता ज्ञानेंद्र बहादुर कार्की ने कहा कि समिति हुमला जिले में लिमी लापचा से लेकर नमखा ग्रामीण नगरपालिका के हिलसा तक, नेपाल-चीन सीमा से संबंधित समस्याओं का अध्ययन करेगी। चीन ने कथित तौर पर नेपाली भूमि पर अतिक्रमण कर पिछले साल हुमला में नौ इमारतें बनाई थीं। मुख्य जिला अधिकारी के नेतृत्व में एक सरकारी टीम ने भी स्थल पर अध्ययन किया है।

पिछली सरकारी रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं

हालांकि, इस टीम की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने नेपाल के क्षेत्र में चीन के अतिक्रमण की खबरों को खारिज कर दिया था। तब नेपाली कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। अब नेपाल में नेपाली कांग्रेस की सरकार है। ऐसे में पीएम देउबा पूरे मामले की जांच कराने की तैयारी में हैं।

कमेटी में इन विभागों के अधिकारी शामिल

सरकार के प्रवक्ता और कानून, न्याय व संसदीय मामलों के मंत्री कार्की ने कहा कि नयी समिति में सर्वेक्षण विभाग, नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस और सीमा विशेषज्ञों के अधिकारी शामिल होंगे। इसका गठन गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव के समन्वय के तहत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समिति गृह मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपेगी। हालांकि, समिति के लिए रिपोर्ट जमा करने की कोई समय सीमा तय नहीं की गई है।

चीनी मीडिया ने अपने इलाके में बताया था निर्माण

चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया था कि ये बिल्डिंग्स दक्षिण पश्चिम चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के बुरंग काउंटी में एक नवनिर्मित गांव में बने हुए हैं। बुरंग काउंटी के विदेशी संबंध कार्यालय निदेशक बेकी के हवाले से ग्लोबल टाइम्स ने लिखा था कि मई महीने में इनका निर्माण शुरू करने से पहले सैन्य और स्थानीय पेशेवर सर्वेक्षण और मैपिंग कर्मियों इस क्षेत्र का विस्तृत मैपिंग की। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि इन बिल्डिंग्स का निर्माण चीन की तरफ हो।

नेपाली सर्वेक्षण कर्मियों को बताया गैर पेशेवर

ग्लोबल टाइम्स ने यह भी कहा था कि नेपाल के सर्वेक्षणकर्मी कम प्रशिक्षित और गैर पेशेवर हैं। इसी कारण सीमा के निर्धारण में वे गलतियां कर रहे हैं। पिलर संख्या 11 और 12 एक दूसरे से बहुत दूरी पर और बहुत ऊंचाई पर स्थित हैं। ऐसे में सीमा निर्धारित करने के दौरान गलतियां होना आम बात है। संभावना है कि नेपाली सर्वेक्षण टीम ने एक तकनीकी त्रुटि की। चीनी और नेपाली सरकारों ने अपनी सीमा निर्धारित करने के बाद तीन संयुक्त सीमा निरीक्षण किए हैं और उन्हें कोई समस्या नहीं हुई है।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...