मध्यप्रदेश के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण राष्ट्र-स्तरीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत को दालों के उत्पादन में पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाना और किसानों की आय में सतत वृद्धि सुनिश्चित करना रहा।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दलहन आत्मनिर्भरता मिशन, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किया गया एक दूरदर्शी संकल्प है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश को दालों के लिए आयात पर निर्भर न रहना पड़े और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले।

मिशन के अंतर्गत अमलाहा में ICAR और ICARDA के सहयोग से अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। इनमें प्लांट जीनोमिक्स और टिश्यू कल्चर जैसी सुविधाएं शामिल हैं। वैज्ञानिक ऐसी नई किस्मों पर कार्य कर रहे हैं, जो कम समय में तैयार हों। उदाहरण के तौर पर मसूर की ऐसी किस्म विकसित की जा रही है, जो 110–120 दिनों के बजाय मात्र 70–80 दिनों में पक सके। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता और अधिक उत्पादन देने वाली फसल किस्मों पर भी शोध जारी है।
मिशन के तहत किसानों के लिए दलहन क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इन क्लस्टरों में शामिल किसानों को बीज किट उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा आदर्श खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को ₹10,000 प्रति हेक्टेयर की सीधी सहायता राशि देने का प्रावधान किया गया है।
सरकार राज्यों के सहयोग से ‘बीज ग्राम’ और ‘बीज हब’ विकसित कर रही है, ताकि किसान स्वयं उन्नत बीज उत्पादन कर सकें और उन्हें बाजार में बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। इससे बीजों की गुणवत्ता और उपलब्धता दोनों में सुधार होगा।

दालों के प्रसंस्करण के लिए देशभर में 1000 दाल मिलें स्थापित करने की योजना है, जिनमें से 55 मिलें अकेले मध्यप्रदेश में लगाई जाएंगी। प्रत्येक दाल मिल की स्थापना पर सरकार द्वारा ₹25 लाख तक की सब्सिडी दी जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने विभिन्न दालों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किए हैं और 100 प्रतिशत खरीद का आश्वासन दिया है।
तुअर (अरहर): ₹8000 प्रति क्विंटल
उड़द: ₹7800 प्रति क्विंटल
मसूर: ₹7000 प्रति क्विंटल
चना: ₹5875 प्रति क्विंटल
इस वर्ष दलहन मिशन के अंतर्गत राज्यों को ₹1800 करोड़ से अधिक की सहायता दी जाएगी। इसमें से मध्यप्रदेश को लगभग ₹354 करोड़ की राशि प्राप्त होगी, जिससे अनुसंधान, उत्पादन और विपणन को और सशक्त किया जाएगा।
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के कई राज्यों के कृषि मंत्री शामिल हुए। इनमें ओडिशा से कनकवर्धन सिंह देव, पंजाब से गुरमीत सिंह खुडियन, छत्तीसगढ़ से रामविचार नेताम, बिहार से राम कृपाल यादव, गुजरात से रमेशभाई कटारा, उत्तर प्रदेश से सूर्य प्रताप साही, हरियाणा से श्याम सिंह राणा और पश्चिम बंगाल से सोवानदेव चट्टोपाध्याय प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर यह सम्मेलन दालों के क्षेत्र में अनुसंधान, उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को एकीकृत करते हुए “बीज से बाजार तक” की मजबूत श्रृंखला विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा भी सुदृढ़ होगी।