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अजमेर में रखा था शादी का भोज, दो दिन पहले निकालनी पड़ी मां-बेटी की अर्थी

By: Amit ranjan 
Updated:
अजमेर में रखा था शादी का भोज, दो दिन पहले निकालनी पड़ी मां-बेटी की अर्थी

नई दिल्ली : चारों तरफ शादी की भोज को लेकर साज-सजावट किया जा रहा था, निमंत्रण दिये जा रहे थे, हर्ष और खुशी का माहौल था। लेकिन एक हादसे ने इस खुशी के माहौल को मातम में तब्दील कर दिया। जिससे चारों तरफ चिख-पुकार की आवाज गुंज उठी। जहां एक तरफ लोग शादी भोज को लेकर तरह-तरह की तैयारियां कर रहे थे, तो वहीं दूसरी तरफ दो दिन पहले ही एक साथ मां-बेटी की अर्थी निकालनी पड़ी।

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आपको बता दें कि मां-बेटी के शव को एक साथ देखकर हर किसी के आंख नम थें। किसी को ये अंदेशा नहीं था कि एक बड़ा हादसा इस परिवार की सारी खुशियां छिन लेगा। बता दें कि ये पूरा मंजर उस बस हादसे के बाद का है, जिसने ना जानें कितने घरों का उजाड़ दिया। किसी को उसकी मां से जुदा किया, तो किसी को उसके भाई से। और इसी हादसे ने एक साथ मां-बेटी को भी उसके परिवार से जुदा किया, जो अजमेर में रखें गये शादी की भोज को लेकर जा रहें थे।

दरअसल, बस में करंट लगने से 65 वर्षीय चांददेवी और उनकी 44 साल की बेटी सोनल जैन की मौत हो गई थी। सोनल की शादी उदयपुर में हुई थी, लेकिन वह अपने पति अनिल जैन के साथ मायके में ब्यावर में रह रही थी। बता दें कि मृतक चांद देवी की बहन की बेटी की शादी का भोज का कार्यक्रम रविवार को अजमेर में रखा गया था। इसी उपलक्षय में कई मेहमान आ चुके थे। लेकिन दो दिन पहले ही यह बस हादसा हो गया और खुशी का माहौल गम में बदल गया। सब यही कह रहे थे कि देखो तो हम शादी के भोज में आए थे और अब रसोई का भोजन करना पड़ेगा।

बस हादसे के एक चश्मदीद राजेन्द्र जैन ने बताया कि बस में सभी यात्री जैन समाज के श्रद्धालु थे जो जालोर के मांडोली में जैन मंदिर के दर्शन करके लौट रहे थे। कोई नींद में था तो कई आपस में बात कर रहा था। अचानक एक झटका लगा और जोर से आवाज आई तो सभी लोग चीखने लगे। इसी दौरान जब मैंने खिड़की से झांककर देखा तो टायर के पास आग लगी हुई थी। कुछ ही पल में वह आग पूरे बस में लग गई। इसके बाद बस में अफरा-तफरी मच गई। लोग बचाओ-बचाओ चिल्ला रहे थे, कोई मर चुका था तो कई बेसुध था।

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हादसे के वक्त किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था, पूरी बस में आग और आसपास अंधेरा था, लोग इसअधेरे में बुरी तरह से चीख-पुकार रहे थे। मैं खिड़की की तरफ बैठा हुआ था, आग जब अंदर आई तो मैंने पास वाली कई खिड़कियों की कांच तोड़ दिए। जिससे लोग उसमें से कूदने लगे। मेरे साथ मेरी दो बहनें भी इस यात्रा में थीं, पहले मैंने उनको बाहर निकला, इसके बाद मैंने भी छलांग लगा दी। तब तक बस में आग काफी फैल चुकी थी। कुछ ही सेकंड्स में भयानक लपटें उठने लगीं, जो लोग अंदर रह गए वह जिंदा जलकर मर गए।

एक अन्य चश्मदीद 21 साल के दर्शन ने बताया कि, बस का ड्राइवर रास्ता भटक गया और एक गांव की तरफ ले गया, जहां संकरे रास्ते में गाड़ी एक टैक्टर से टकरा गई। पीछे लौटाते समय बस 11 केवी की लाइन की चपेट में आ गई और यह हादसा हो गया। देखते ही देखते करंट पूरी बस में फैल गया और भयानक आग लग गई।

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