उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले मे एक युवती ने नारी निकेतन शेल्टर होम और जिला अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए है। दरअसल, 22 साल की पिंकी का आरोप है कि धर्म परिवर्तन अध्यादेश 2020 कानून के तहत उसका पति जेल में बंद है। पति के जेल जाने के बाद उसे नारी निकेतन गृह शेल्टर होम में रखा गया था।
इस दौरान उसे चिकित्सा सुविधा देने में अनदेखी की गई और इस वजह से उसका गर्भपात हो गया। महिला का आरोप है कि शेल्टर होम में उसे प्रताड़ित भी किया गया। वहीं, महिला के आरोपों को जिला अस्पताल ने गलत बताकर खारिज कर दिया है।
पीड़ित पिंकी ने बताया कि वह नारी निकेतन में सात से आठ दिनों तक रही। इस दौरान उसके पेट में दर्द होने लगा। महिला का कहना है कि उसने इस बारे में निकेतन के प्रभारी को बताया, लेकिन उन्होंने उसे कोई दवा नहीं दी। महिला का आरोप है, दवा न मिलने से मेरी हालत खराब होने लगी।
इसके बाद मुझे 11 दिसंबर को एक अस्पताल में भर्ती किया गया। मुझे बाद में बताया गया कि मेरा गर्भपात हो गया है।महिला ने अपने गर्भपात के लिए डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराया है। महिला का कहना है कि इंजेक्शन की वजह से उसका गर्भपात हुआ।
उसने कहा, मैं नहीं जानती कि मुझे किस तरह की दवाएं एवं इंजेक्शन दिया गया। मेरे पेट में दर्द हुआ था जिसके बाद मुझे अस्पताल ले जाया गया। मुझे नहीं पता कि मेरे साथ वहां पर क्या हुआ। तो वहीं, दूसरी तरफ महिला के आरोपों पर जिला अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट का कहना है कि रक्त स्राव एवं दर्द रोकने के लिए उसे दवाएं दी गईं।
चिकित्सा अधिकारी ने बताया, अल्ट्रासाउंट से पता चला कि महिला के पेट में पलने वाले भ्रूण में हृदय की धड़कन नहीं थी। टीवीएस कराने की सलाह दी गई और उसे मेरठ के लिए रेफर किया गया। महिला के रिश्तेदार उसे निजी वाहन में ले जाना चाहते थे। उसने जो आरोप लगाए हैं वे गलत हैं।