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मिर्ज़ापुर : आंखों में रोशनी ना होने के बाद भी दुसरो के घर करेंगे उजाला

By RNI Hindi Desk 
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कोरोना महामारी के बीच आई दिवाली पर हर किसी को आस है। उम्मीद है कि दीयों की रोशनी से महामारी का अंधेरा छटेगा और हर घर में खुशियां आएंगी। कुछ इसी तरह की खुशी का इंतजार कर रहे हैं मिर्ज़ापुर जिले के अहरौरा बाजार के रहने वाले बुजुर्ग सूरदास। इनकी आंखों में रोशनी नहीं है लेकिन 50 सालों से हर दिवाली ये दीये बनाकर दूसरों के घरों को रोशन करते हैं। महामारी के चलते बिक्री भले कम है लेकिन इन्हें उम्मीद है कि दिवाली तक अच्छी-खासी बिक्री हो जाएगी।

मिर्ज़ापुर के अहरौरा बाजार के रहने वाले बुजुर्ग सूरदास को बचपन से ही आंखों से कुछ दिखाई नहीं देता। पड़ोसी उन्हें सूरदास कहकर बुलाते हैं। इनके हाथों में ऐसा हुनर की हर कोई फेल हो जाए। लोग इनको बसन्तु कोहार उर्फ सूरदास के नाम से पुकारते हैं। ये जब दस साल के हुए तो अपने नाना के काम में हाथ बंटाने लगे। इनके नाना चॉक से मिट्टी के घड़े, दिये, बर्तन और खिलौने बनाते थे।

अपने नाना से सीखी कला
सूरदास अपने नाना से मिट्टी के पात्र बनाने को लेकर जिद करने लगे। यह जानते हुए की सूरदास कुछ देख नहीं सकते, इसके बावजूद नाना ने इनका हाथ पकड़कर दीये, घड़े, बर्तन और खिलौने बनाना सिखाने लगे। करीब 18 साल की अवस्था में मिट्टी के पात्र बनाने में अपने नाना से मनोरथ हासिल कर लिये।

अपाहिज लड़की से हुई शादी
कुछ दिनों बाद इनके सर से नाना का साया भी हट गया और ये बिल्कुल अकेले पड़ गए। रिश्तेदारों ने किसी तरह अपाहिज लड़की से इनकी शादी करा दी। इनका एक लड़का भी है, जो कि अर्धविक्षिप्त है। वो भी काम में सहयोग करता है।

50 सालों से बेच रहे मिट्टी के सामान
सूरदास बसन्तु इस वक्त 73 साल के हैं। सूरदास बताते हैं कि वो करीब 50 सालों से मिट्टी के सामानों को बनाकर बाजार में बेचते हैं। इससे अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। दिवाली इनके लिए कुछ खास अहमियत रखती है। ये हर साल दिवाली पर दीये, घरिया, खिलौने बेचकर चार से पांच हजार की कमाई कर लेते हैं।

गांव में अब भी मिट्टी से बने सामानों की बिक्री
बाजार में चाइनीज सामानों के आ जाने से लोग मिट्टी से बने सामानों को कम ही खरीदते हैं किन्तु गांव में अधिकातर लोग अब भी मिट्टी से बने सामानों का इस्तेमाल करते हैं जिससे इनकी रोजी रोटी चल जाती है। इनकी एक लड़की है जिसकी शादी हो गई है। दामाद इनके साथ रहता है और इनके काम में मदद करता है।

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