नई दिल्ली : कृषि कानून को लेकर देश भर के किसान दो महीने से अधिक समय से दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन जारी है। किसान कृषि कानून वापस लेने पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार तीनों कृषि कानून को वापस लें, तब ही वह ये प्रदर्शन बंद करेंगे।
किसानों को दिल्ली में रोकने के लिए गाजीपुर बॉर्डर सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त की गई है। कंटीले तारों सहित बैरिकेडिंग है और रोड पर कीलें गाड़ी गई हैं ताकि किसान ट्रैक्टर लेकर दिल्ली में प्रवेश न कर सकें। इस पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने आपत्ति जताई है।
बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने केंद्र सरकार पर कृषि कानून, केंद्रीय बजट और सरकारी रवैये को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि तीन कृषि कानूनों की वापसी की वाजिब माँग को लेकर खासकर दिल्ली की सीमाओं पर आन्दोलित किसानों के प्रति सरकारी रवैये के कारण संसद के बजट सत्र में भी जरूरी कामकाज व जनहित के खास मुद्द पहले दिन से ही काफी प्रभावित हो रहे हैं। केन्द्र किसानों की माँग पूरी करके स्थिति सामान्य करे।
1. तीन कृषि कानूनों की वापसी की वाजिब माँग को लेकर खासकर दिल्ली की सीमाओं पर आन्दोलित किसानों के प्रति सरकारी रवैये के कारण संसद के बजट सत्र में भी जरूरी कामकाज व जनहित के खास मुद्द पहले दिन से ही काफी प्रभावित हो रहे हैं। केन्द्र किसानों की माँग पूरी करके स्थिति सामान्य करे।1/2
— Mayawati (@Mayawati) February 3, 2021
वहीं 26 जनवरी को हुए हिंसा के बाद से दिल्ली पुलिस समेत, सुरक्षा जवान उन सभी सीमाओं पर खड़े हैं, जहां से एक बार फिर हिंसा होने की आशंका है। जिसके बाद सरकार ने सख्ती दिखते हुए कार्यवाही की है। जिसके बाद से सभी राजनीतिक पार्टी सरकार पर निशाना साध रही है।
इस बीच मायावती ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लाखों आन्दोलित किसान परिवारों में दहशत फैलाने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर जो कंटीले तारों व कीलों आदि वाली जबर्दस्त बैरिकेडिंग की गई है वह उचित नहीं है। इनकी बजाए यदि आतंकियों आदि को रोकने हेतु ऐसी कार्रवाई देश की सीमाओं पर हो तो यह बेहतर होगा।
मायावती ने मोदी सरकार द्वारा पेश केंद्रीय बजट पर सवाल उठाये हैं। उन्होंने कहा कि संसद में आज पेश केन्द्र सरकार का बजट पहले मन्दी व वर्तमान में कोरोना प्रकोप से पीड़ित देश की बिगड़ी अर्थव्यवस्था को संभालने तथा यहाँ की अति-गरीबी, बेरोजगारी व महंगाई आदि की राष्ट्रीय समस्या को क्या दूर कर पाएगा? इन्हीं आधार पर सरकार के कार्यकलापों व इस बजट को भी आँका जाएगा।
बहुजन समाज वादी पार्टी की नेता माया आती ने आगे कहा कि देश की करोड़ों गरीब, किसान व मेहनतकश जनता केन्द्र व राज्य सरकारों के अनेकों प्रकार के लुभावने वायदे, खोकले दावे व आश्वासनों आदि से काफी थक चुकी है तथा उनका जीवन लगातार त्रस्त है। सरकार अपने वायदों को जमीनी हकीकत में लागू करें तो यह बेहतर होगा।