मध्यप्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत रेहड़ी-पटरी लगाने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडर्स को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर राज्य में पीएम स्वनिधि 2.0 के अंतर्गत लोन व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। अब वेंडर्स को लोन की पूरी राशि बिना किसी कटौती के मिलेगी और बैंकों द्वारा पहले काटी गई ब्याज की रकम भी वापस लौटाई जाएगी। इस फैसले से छोटे व्यापारियों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और योजना के प्रति भरोसा और बढ़ेगा।
राज्य सरकार के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अनुसार, पहले बैंकों द्वारा सुरक्षा के नाम पर लोन से ब्याज की राशि अग्रिम रूप से काट ली जाती थी, जिससे हितग्राहियों को पूरा पैसा नहीं मिल पाता था। अब यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। बैंकों द्वारा पहले काटी गई लगभग 120 करोड़ रुपये की ब्याज राशि हितग्राहियों को वापस की जाएगी, जिससे रेहड़ी-पटरी वालों को सीधा लाभ मिलेगा।
पीएम स्वनिधि योजना के तहत केंद्र सरकार पहले से ही 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश सरकार ने शेष ब्याज वहन करने का निर्णय लिया है। वित्त मंत्रालय की सहमति से अब 14 प्रतिशत ब्याज दर की अपर कैप तय की गई है। इसका अर्थ यह है कि बैंक अब बिना किसी कटौती के पूरी लोन राशि देंगे और ब्याज का भुगतान राज्य सरकार करेगी। हितग्राही के लिए यह लोन प्रभावी रूप से शून्य ब्याज पर उपलब्ध होगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी पीएम स्वनिधि योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। सितंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 13 लाख 46 हजार से अधिक रेहड़ी-पटरी वालों को इस योजना से जोड़ा जा चुका है। अब तक 2,078 करोड़ रुपये का लोन वितरित किया गया है, जबकि ब्याज सब्सिडी के रूप में राज्य सरकार करीब 30 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है।
पीएम स्वनिधि योजना को छोटे व्यापारियों के लिए संजीवनी माना जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर बैंकों की अग्रिम ब्याज कटौती (Upfront Deduction) के कारण कई हितग्राही योजना से दूरी बना रहे थे। इसी तकनीकी और व्यावहारिक समस्या को दूर करने के लिए स्वनिधि 2.0 के तहत यह बड़ा सुधार किया गया है, जिससे योजना अधिक पारदर्शी और हितग्राही-अनुकूल बन सके।
1. बिना गारंटी वर्किंग कैपिटल- यह योजना बिना किसी जमानत या गारंटी के छोटे व्यापारियों को कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराती है, जिससे वे अपना व्यवसाय दोबारा खड़ा कर सकें।
2. तीन चरणों में बढ़ता लोन
पहली किस्त: ₹10,000
दूसरी किस्त: ₹20,000 (पहला लोन चुकाने पर)
तीसरी किस्त: ₹50,000 (समय पर भुगतान करने पर)
3. प्रभावी रूप से जीरो प्रतिशत ब्याज- केंद्र और राज्य सरकार की ब्याज सब्सिडी के चलते हितग्राही पर किसी प्रकार का ब्याज बोझ नहीं पड़ता।
4. डिजिटल लेन-देन पर कैशबैक- डिजिटल भुगतान (UPI/QR कोड) अपनाने वाले वेंडर्स को सालाना ₹1,200 तक का कैशबैक सीधे बैंक खाते में मिलता है।
यदि कोई हितग्राही निर्धारित समय सीमा में लोन चुका देता है, तो वह तुरंत अगली बड़ी किस्त के लिए पात्र हो जाता है। इससे न केवल उसकी क्रेडिट हिस्ट्री मजबूत होती है, बल्कि कारोबार विस्तार के लिए बड़ी पूंजी भी सुनिश्चित होती है। पीएम स्वनिधि योजना में किए गए ये बदलाव मध्यप्रदेश के रेहड़ी-पटरी वालों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होंगे और छोटे कारोबारियों को आत्मनिर्भर बनने का मजबूत आधार प्रदान करेंगे।