पन्ना। जिले के सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था पिछले कुछ दिनों से प्रभावित है। जानकारी के मुताबिक 15 सितंबर से प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों को मध्यान्ह भोजन नहीं मिल पा रहा है। रसोइयों का आरोप है कि उन्हें कई महीनों से मानदेय नहीं मिला है, जबकि कुछ स्व-सहायता समूहों ने समय पर खाद्यान्न उपलब्ध नहीं होने की भी शिकायत की है।
पन्ना जिले में 1,638 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें करीब डेढ़ लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था के लिए सरकारी बजट का प्रावधान है, लेकिन भुगतान और खाद्यान्न से जुड़ी समस्याओं के कारण भोजन वितरण प्रभावित होने की बात सामने आई है।
विद्यालयों में भोजन तैयार करने वाले स्व-सहायता समूहों से जुड़े रसोइयों का कहना है कि उन्हें जुलाई 2026 से मानदेय नहीं मिला है। रसोइयों को प्रति माह 4 हजार रुपये मानदेय दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण रसोइयों ने काम बंद कर दिया। रसोइयों ने अपनी समस्याओं को लेकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा था। उन्होंने लंबित मानदेय के साथ समय पर खाद्यान्न उपलब्ध नहीं होने की समस्या भी अधिकारियों के सामने रखी थी।

रसोइयों और संबंधित समूहों की ओर से बड़ी राशि के भुगतान लंबित होने की बात कही गई है। इसके चलते स्कूलों में भोजन बनाने की व्यवस्था प्रभावित हुई है। ज्ञापन देने के बावजूद तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से बच्चों को मध्यान्ह भोजन नहीं मिल पाने की स्थिति बनी हुई है।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उमराव सिंह मरावी ने बताया कि विद्यालयों में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर मध्यान्ह भोजन के लिए 60 प्रतिशत छात्र संख्या का भुगतान किया जाता है। उन्होंने कहा कि पोर्टल में आई तकनीकी गड़बड़ियों के कारण भुगतान में परेशानी हुई है। अधिकारी के मुताबिक भुगतान के लिए बजट उपलब्ध हो चुका है और जल्द ही लंबित राशि का भुगतान कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भुगतान में और देरी होती है तो शिक्षा समितियों के माध्यम से विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन की वैकल्पिक व्यवस्था कराई जाएगी।
मध्यान्ह भोजन बंद होने से बच्चों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ी है। रसोइयों और स्व-सहायता समूहों की मांग है कि लंबित मानदेय का भुगतान जल्द किया जाए और स्कूलों में खाद्यान्न की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन व्यवस्था जल्द सामान्य हो सके।