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चुनाव से पहले भगवान राम की एंट्री, संजय सिंह के आरोपों पर चंपत राय का इनकार, कहा-राजनीति से प्रेरित हैं आरोप

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

अयोध्या: यूपी विधानसभा चुनाव जैसै-जैसे नजदीक आ रहा है, सूबे में सियासी उलटफेर और आरोप प्रत्यारोप का दौर भी शुरु हो गया है। राम मंदिर का मामला सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हल किए जाने के बाद भगवान श्री राम का चर्चा एक बार फिर सूबे में होने लगा है। ये महज संयोग है या कुछ और इसको समझने की जरुरत है। विधानसभा चुनाव से लगभग 6 महीने पहले भगवान राम का मुद्दा उछलना ही अपने आप में सब कुछ बयां कर रहा है।

आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह और पूर्व राज्य मंत्री पवन पांडेय ने आरोप लगाया है कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट पर राम मंदिर के लिए जमीन खरीदने में भ्रष्टाचार हुआ है। इस आरोप के बाद सूबे में सियासत के लिए एक नया मुद्दा मिल गया है। विपक्षीय पार्टियां लगातार हमलावर हैं। भ्रष्टाचार के आरोप के बाद रविवार को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सफाई देते हुए कहा जो आरोप लगे हैं उनकी मैं स्टडी करूंगा। वहीं देर रात उनकी तरफ से एक प्रेस रिलीज भी जारी की गई।

आपको बता दें कि प्रेस रिलीज में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत ने कहा कि 9 नवंबर, 2019 को श्री राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद अयोध्या में जमीन खरीदने के लिए देश के कई लोग आने लगे। वहीं खुद उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या के विकास के लिए बड़ी मात्रा में जमीन खरीद रही है, इस कारण अयोध्या में जमीनों के दाम बढ़ गए।

उन्होने आगे कहा कि जिस भूखंड पर चर्चा की जा रही है वह रेलवे स्टेशन के पास बहुत प्रमुख जगह है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने अभी तक जितनी भूमि खरीदी है खुले बाजार की कीमत से बहुत कम दामों पर खरीदी है। वहीं जिस जमीन की खरीद को लेकर आरोप लगा हैं, उस सफाई देते हुए कहा गया है कि, उस जमीन को खरीदने के लिए वर्तमान विक्रेताओं ने सालों पहले जिन दामों पर रजिस्टर्ड एग्रीमेंट किया था, उस जमीन को उन्होंने 18 मार्च 2021 को बैनामा कराया। इसके बाद ही ट्रस्ट के साथ एग्रीमेंट किया।

प्रेस रिलीज में उन्होने साफ कहा है कि जो भी राजनीतिक लोग इस संबंध में प्रचार कर रहे हैं वह भ्रामक है और समाज को गुमराह करने के लिए है। ये सारे ही आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और इसीलिए ये राजनीतिक लोगों द्वारा ही लगाए जा रहे हैं।

आपको बता दें कि मामला उस वक्त सामने आया जब आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सदस्य और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करा रहे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए।

सांसद संजय सिंह ने पूरे मामले की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराने की मांग की है। उन्होने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने संस्था के सदस्य अनिल मिश्रा की मदद से दो करोड़ रुपए कीमत की जमीन 18 करोड़ रुपए में खरीदी। यह सीधे-सीधे मनी लॉड्र‍िंग का मामला है और सरकार इसकी सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराए।

इधर विपक्षीय पार्टियों को भी एक मौका मिल गया। समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा खरीदी जमीन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ’10 मिनट पहले 2 करोड़ में जमीन का बैनामा हुआ और उसी दिन फिर साढ़े 18 करोड़ में एग्रीमेंट हुआ। एग्रीमेंट और बैनामा दोनो में ही ट्रस्टी अनिल मिश्रा और मेयर ऋषिकेष उपाध्याय गवाह हैं। जिस जमीन को दो करोड़ में खरीदा गया उसी जमीन का 10 मिनट बाद साढ़े 18 करोड़ में एग्रीमेंट क्यों हुआ? 5 मिनट में ही 2 करोड़ की जमीन साढ़े 18 करोड़ की हुई। जमीन की कीमत कैसे बढ़ी?

विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर भगवान राम सियासी आरोप-प्रत्यारोप में आ गये हैं। देखना यह है कि संजय सिंह द्वारा लगाया गया आरोप कितना सही है, और चंपत राय द्वारा दी गई सफाई में कितना दम है।

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