टीकमगढ़। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले को धार्मिक पर्यटन और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि टीकमगढ़ के प्रसिद्ध कुंडेश्वर धाम को विकसित कर महाकाल लोक की तर्ज पर ‘कुंडेश्वर लोक’ बनाया जाएगा। इसके लिए पर्यटन विभाग विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगा। मुख्यमंत्री ने अपने टीकमगढ़ दौरे के दौरान जिला विकास समिति की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में जिले के विकास, रोजगार, उद्योग और सुशासन को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कुंडेश्वर धाम के विकास और विस्तार से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। सरकार की योजना कुंडेश्वर क्षेत्र को बेहतर सुविधाओं से विकसित करने की है, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुविधाजनक वातावरण मिल सके। उन्होंने कहा कि कुंडेश्वर लोक के विकास के लिए पर्यटन विभाग द्वारा व्यवस्थित योजना तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
टीकमगढ़ की पारंपरिक कला और शिल्प को बढ़ावा देने पर भी सरकार का जोर है। मुख्यमंत्री ने जिले के पीतल कारीगरों और उनकी हस्तशिल्प कला को प्रोत्साहित करने की बात कही। इससे स्थानीय कारीगरों को बाजार और रोजगार के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योग निवेश वर्ष और किसान कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है। सागर में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के बाद कई निवेशकों ने प्रदेश में उद्योग स्थापित किए हैं और कुछ इकाइयों में उत्पादन भी शुरू हो चुका है।उन्होंने बताया कि निवाड़ी-टीकमगढ़ क्षेत्र के बीच करीब 3,000 करोड़ रुपये की इस्पात उद्योग इकाई भी शुरू हो चुकी है। सरकार का लक्ष्य क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि आधारित और फूड प्रोसेसिंग उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। उद्योगों की जरूरत के अनुसार कुशल मानव संसाधन तैयार करने के लिए आईटीआई और कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योगों से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार योग्य प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि सभी पात्र नागरिकों को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले। किसान सम्मान निधि और लाड़ली बहना योजना समेत विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की लगातार समीक्षा की जा रही है। उन्होंने बताया कि निराश्रित बच्चों के लिए 4,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों को सर्वे कराकर पात्र लोगों की पहचान करने और उन्हें योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुशासन सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि नल-जल योजना, राशन वितरण और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक प्रभावी तरीके से पहुंचना चाहिए। कार्यों में लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने टीकमगढ़ जिले में प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव के संकेत दिए। उन्होंने तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके टीकमगढ़ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को अन्यत्र पदस्थ करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा लगातार जारी रहेगी।
टीकमगढ़ प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने जिले के प्रभावशाली नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिले की स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए आगामी विकास कार्यों की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इस अवसर पर टीकमगढ़ जिले की प्रभारी मंत्री एवं पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्द्ध-घुमक्कड़ कल्याण विभाग की राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।