पायरिया एक बीमारी है जो मसूड़ों को प्रभावित करती है। इस बीमारी के होने पर मसूड़ों को चारों और से सहारा देने वाले ऊतक प्रभावित होने लग जाते है और धीरे धीरे असहनीय दर्द मुँह में होने लगता है और कई मामलों में तो खून भी निकलता है। जब व्यक्ति को यह रोग होता है तो उसके मुंह से बदबू आती है वही दांत कमजोर हो जाते है, मसूड़ों में जलन होने लगती है।
अगर किसी को पायरिया है तो उसके मसूड़े और दांतो के बीच धीरे धीरे दूरी बनती जाती जिसके कारण उसमे गन्दगी जमा होने लगती है। इसके बाद सूजन आना शुरू होती है वही बैक्टीरिया के कारण संक्रमण होने लगता है और असहनीय पीड़ा व्यक्ति को हो सकती है।
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माना जाता है कि यह रोग स्मोक करने वालों में अधिक होता है, कई मामलों में देखा गया है की मधुमेह के रोगी को भी यह रोग होने की संभावना रहती है। दांतों की ठीक से देखभाल न करने वही अच्छे से भोजन का पाचन नहीं होने पर यह रोग कई बार महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान अधिक खून बहने से इस रोग की संभावना होती है। शरीर में विटामिन और कैल्सियम की कमी भी इस रोग का कारण बनती है। तो आज इस लेख में हम आपको बताने वाले है स्वामी रामदेव के कुछ ऐसे उपाय जिनको अपना कर आप इस बीमारी से अपने आप को बचा सकते है।
स्वामी रामदेव कहते है कि कई मामलों में तो कीटाणु लार में घुलकर पेट में चले जाते है जिसके कारण इन्फेक्शन का ख़तरा बढ़ सकता है। स्वामी जी कहते है कि पायरिया से बचने के लिए ज्यादा ठंडा गरम खाने से बचे, वही खाने के बाद अपने दांतों को अच्छे से साफ़ करे। वही नीम और बबूल की दांतुन का भी इस्तेमाल करे। भुना हुआ चना खाने और गन्ना चूसने से भी पायरिया मिलती है।
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स्वामी जी कहते है कि अधिक ब्रश करने वालों को भी पायरिया हो सकता है। रसायनों से बने हुए टूथपेस्ट नहीं करे बल्कि हर्बल और आयुर्वेदिक टूथपेस्ट का इस्तेमाल करे। वही प्राणायाम की बात करे तो व्यक्ति को रोज़ 15 से 20 मिनट कपालभाती और अनुलोम विलोम प्राणायाम करना चाहिए, वही अधिक गर्म चीज़े भी नहीं खानी चाहिए वरना दांतों से खून आना शुरू हो जाएगा। कोशिश करे की घर पर ही दन्त मंजन बनाये जिसमे 100 ग्राम हल्दी, सेंधा नमक,फिटकरी की भस्म,त्रिफला चूर्ण, नीम के सूखे पत्ते, बबूल की छाल, और 20 ग्राम लौंग मिलाकर घर पर ही दन्त मंजन बना लेना चाहिए और इसका नियमित सेवन करना चाहिए।
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तो आज हमनें आपको बताया की कैसे आप स्वामी रामदेव की बाते मानकर पायरिया को होने से रोक सकते है वही अगर यह रोग है तो कैसे आप इससे अपना बचाव कर सकते है। अगले लेख में हम बात करेंगे आपकी सेहत से जुड़े किसी और मुद्दे पर।