आज वायु प्रदूषण एक आम समस्या बन गया है और देश के कई बड़े बड़े शहरों की हवा दूषित हो गयी है जिसका सीधा असर इंसान के सांस लेने पर पड़ता है, दरअसल हम सब इस बात को जानते है की फेफड़ों से श्वास नलिकाएं हवा को अंदर बाहर करती है और हम अच्छे से सांस ले पाते है।
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लेकिन अगर आपको अस्थमा है तो आपकी इन नलिकाओं में सूजन आ जायेगी और अच्छे से हवा अंदर बाहर नहीं हो पाती है जिसके कारण श्वास लेने में परेशानी होती है और धीरे धीरे यह जानलेवा हो जाती है। इसके साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह पूरी तरह ठीक नहीं हो सकता क्यूंकि अस्थमा का कारण वातावरण ही है। धूल-मिट्टी और धुंएं की मात्रा जितनी वायुमंडल में होगी इसका खतरा उतना ही बढ़ जाएगा।
इस बीमारी की सबसे बड़ी बात यह है कि यह किसी भी उम्र के व्यक्ति, महिला या बच्चे को हो सकती है। इस बीमारी की कोई स्पेसिफिक उम्र नहीं है कि इस उम्र में ही आपको अस्थमा होगा, आज कल तो यह स्कूल के बच्चों को होने लगी है तो आज इस लेख में हम आपको बताने वाले है कुछ ऐसे उपाय के बारे में जिन्हे अपनाकर आप इस बीमारी को कंट्रोल कर सकते है –
स्वामी रामदेव कहते है कि इस बीमारी में प्राणायाम करना बड़ा फायदेमंद रहता है, रोज़ कपालभाती और अनुलोम विलोम करना चाहिए, भर्स्तिका भी करना चाहिए। इसके अलावा गिलोय और स्वाशारी क्वाथ भी आपको लेना चाहिए। वही रोज़ दूध के साथ च्यवनप्राश भी खाना चाहिए। दूध के साथ आप चाहे तो खजूर लीजिये और शिलाजीत भी आपको फायदा देगा।
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अगर घरेलु उपचार की बात करे तो कुछ उपाय अपना कर आप इस बीमारी से बच सकते है, इसमें सबसे प्रमुखता से इस्तेमाल होता है तुलसी का पत्ता, दरअसल रोज़ 10 से 15 तुलसी के पत्ते अगर आप अदरक और शहद के साथ लेते है तो आपके फेंफड़ों से हवा का आदान प्रदान बेहतर हो जाता है। यह श्वास की बीमारी का सबसे पुराना और वैज्ञानिक इलाज है।
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इसके अलावा एक और अच्छा घरेलु उपचार है और वो है छाछ, दरअसल बलगम बनने के कारण भी यह दमे और अस्थमा की बीमारी हो जाती है जिसके कारण शरीर से बलगम को बाहर निकालना ज़रूरी हो जाता है, इसमें छाछ और अजवायन अहम योगदान देते है। दरअसल रोज़ दिन में 1 गिलास छाछ में पीसी हुई अजवायन डालकर इसका सेवन करने से कफ और बलगम शरीर से बाहर निकल जाता है जिसके कारण फेंफड़ों से हवा का प्रवाह शुद्ध होता है।