मुजफ्फरनगर: किसी भी जेल के बारे में जब भी आपको जानकारी मिलती होगी, तो वहां सजा काट रहे बंदियो के अपराध की ही जानकारी मिलती होगी। लेकिन अगर हम आपको कहें की जेल में सजा काट रहे कैदी अब देश के महापुरुषों के बारे में जानेगे और खेल में भी प्रतियोगिता करेगे। तो आप ये जानकर चौक गये होंगे, चौकिए मत! ऐसा हकीकत में होने जा रहा है। हम बात कर रहें हैं यूपी के मुजफ्फरनगर जिला जेल की। यहां ऐसा इसलिए संभव हो पायेगा, क्योंकि वहां एक कुशल प्रशासक के तौर पर जेल अधिक्षक सीताराम शर्मा ने पहल की है।
आपको बता दें कि प्रदेश की संवेदनशील जेलो में गिनती होने वाले मुजफ्फरनगर जिला जेल के अधिक्षक सीताराम शर्मा के सराहनीय प्रयास से जेल में सजा काट रहे कैदी अब जेल में महापुरुषों, धार्मिक, सामाजिक और अन्य प्रेरणादायी पुस्तकें पढ़ कर अपने आचरण में बदलाव करेंगे। इसके लिए जेल अधिक्षक सीताराम शर्मा के प्रयास से पुस्तकालय बनाया जायेगा।
जेल अधिक्षक सीताराम शर्मा के अगुवाई में अधिकारी जेल में बंद कैदियों के आचरण को सुधारने में लगे हैं। इस बारे जेल अधिक्षक सीताराम शर्मा ने कहा कि बंदियो का आचरण सुधारने और उनकी मनोदशा बदलने में पुस्तके सहायक साबित हो सकती हैं। इसके लिए जेल में बीमटेक यूनिवर्सिटी नोएडा के सहयोग से जल्द ही पुस्तकालय का निर्माण कराया जायेगा।
उन्होने आगे बताया कि शुरु में पुस्तकालय में धार्मिक, सामाजिक और महापुरुषों की जीवनी के साथ ही प्रतियोगी परिक्षाओं की एक हजार पुस्तकें रखी जायेंगी। उच्च अधिकारियों को पुस्तकालय निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होने आगे बताया कि पुस्तकालय में बंदियो के लिए नि:शुल्क पुस्तकों की व्यवस्था रहेगी। बंदी लाइब्रेरी में अपनी पसंद की पुस्तक पढ़ सकते हैं।
इसके साथ ही उन्होने बताया कि जेल में जल्द ही खेल गतिविधियां शुरु की जायेंगी। जिससे कैदियो का शारीरिक और मानसिक विकास हो सके। उन्होने कहा कि खेलों में ध्यान देने वाले बंदियो का ध्यान भी इधर-उधर नहीं भटकेगा।
आपको बता दें कि जेल अधिक्षक सीताराम शर्मा इससे पहले उरई जिला जेल के अधिक्षक थे। यहां वो चार साल रहे। उरई जिला जेल में भी सीताराम शर्मा जेल की स्थिति को सुधारने में महत्वपूर्ण प्रयास किए थे। यहां भी उन्होने शैक्षणिक गतिविधियां, पुस्तकालय का निर्माण, और योग कक्षाओं समेंत कई सराहनीय कार्य किए थे।
बतौर उरई जेल अधिक्षक रहते सीताराम शर्मा के बंदियो को सुरक्षित और सुनिश्चित अभिरक्षा समेंत सुधार कार्य करने के लिए उरई जेल को ISO 9001 सर्टिफिकेट मिला था। बीते मार्च महिने में यह सर्टिफिकेट जेल अधिक्षक सीताराम को दिया गया।
मुजफ्फरनगर जेल अधिक्षक सीताराम का लक्ष्य है कि वो अपने सफल प्रयायों से मुजफ्फरनगर जेल को भी ISO सर्टिफिकेट दिलवायें। उन्होने बताया कि जिला कारागार में पुस्तकालय बनवाया जायेगा। खेल गतिविधियां भी शुरु कराई जायेंगी। कारागार को ISO सर्टिफिकेट दिलाने के लिए हर संभव सुधारात्मक कार्य किए जायेंगे।
आपको बता दें कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जेल में किए गए उत्कृष्ट कार्यो के लिए जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा को प्रशंसा चिन्ह (सिल्वर) से नवाजा गया है। IG कारागार प्रशासन एवं सुधाए सेवायें उत्तर प्रदेश ने जेल अधीक्षक को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया है। स्वतंत्रता दिवस पर जेल अधीक्षक को प्रशंसा चिन्ह देकर सम्मानित किया जाएगा।