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पन्ना–खजुराहो रेल परियोजना पर उठे सवाल, नए अलाइनमेंट से फिर कटेंगे हजारों पेड़

पन्ना–खजुराहो रेल परियोजना में सुरक्षा कारणों से रूट बदलने का फैसला लिया गया है, जिसके बाद पहले से काटे जा चुके 52 हजार से अधिक पेड़ों के बावजूद नए अलाइनमेंट में भी 31 हजार से अधिक पेड़ कटने की संभावना है। पुराने रूट में छह तीखे मोड़ों और तकनीकी खामियों को देखते हुए रेलवे ने इसकी समीक्षा शुरू की है। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय तकनीकी समिति गठित की गई है, जो डिजाइन और मंजूरी प्रक्रिया की जांच करेगी।

By: Nivedita 
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पन्ना–खजुराहो रेल परियोजना पर उठे सवाल, नए अलाइनमेंट से फिर कटेंगे हजारों पेड़

पन्ना–खजुराहो रेल परियोजना एक बार फिर सुर्खियों में है। भारतीय रेलवे ने प्रस्तावित रेल लाइन के पुराने अलाइनमेंट में सुरक्षा संबंधी खामियां पाए जाने के बाद मार्ग में बदलाव का निर्णय लिया है। प्रारंभिक जांच में छह तीखे मोड़ों को रेलवे मानकों के विपरीत माना गया, जिसके चलते पूरे रूट की समीक्षा शुरू कर दी गई है।

पहले ही कट चुके थे 52 हजार से अधिक पेड़

परियोजना के शुरुआती चरण में वन विभाग की अनुमति के बाद उत्तरावन मंडल क्षेत्र में 52 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई की जा चुकी थी। इस पर करोड़ों रुपये का खर्च भी किया गया था। अब रूट बदलने के निर्णय के बाद एक बार फिर पर्यावरणीय नुकसान की आशंका बढ़ गई है।

नए रूट में फिर कटेंगे 31 हजार से अधिक पेड़

रेलवे द्वारा तैयार किए जा रहे नए अलाइनमेंट में भी भारी संख्या में पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। जानकारी के अनुसार करीब 31 हजार से अधिक पेड़ नए मार्ग में प्रभावित होंगे, जिससे पर्यावरणीय संतुलन को लेकर चिंता जताई जा रही है।

तकनीकी समिति करेगी पूरे मामले की जांच

पश्चिम मध्य रेलवे ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय तकनीकी समिति का गठन किया है। यह समिति यह पता लगाएगी कि पहले बनाए गए डिजाइन में तकनीकी खामियां कैसे रह गईं और किस स्तर पर लापरवाही हुई।

2100 करोड़ की परियोजना पर बढ़ी निगरानी

करीब 2100 करोड़ रुपये की लागत वाली 72 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन को वर्ष 2021 में मंजूरी मिली थी। परियोजना में 47 पुल और छह स्टेशन बनाए जाने हैं। लेकिन लगातार सामने आ रही तकनीकी और पर्यावरणीय समस्याओं के कारण अब इसकी निगरानी और जांच तेज कर दी गई है।

पर्यावरण और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर उठे सवाल

लगातार पेड़ों की कटाई और रूट परिवर्तन को लेकर पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है। वहीं रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी परियोजना के पुनर्मूल्यांकन के निर्देश दिए हैं। मामले को लेकर जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

 

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