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क्या कांग्रेस के चक्रव्यूह में फंस गई है मायावती ! कितनी सफल होगी इस बार उनकी दलित राजनीति

By: RNI Hindi Desk 
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क्या कांग्रेस के चक्रव्यूह में फंस गई है मायावती ! कितनी सफल होगी इस बार उनकी दलित राजनीति

उत्तरप्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और सालों से इस राज्य के दलितों की एक मात्र मसीहा कांशीराम जी के बाद बहन मायावती जी ही रही है लेकिन अब ऐसा लग रहा है की उनके इस दलित वोट बैंक में कांग्रेस घुसने की कोशिश कर भी रही है और उसे अटेंशन मिल भी रही है वरना बहन जी को एक संत की ह्त्या पर ट्वीट करने की याद कैसे आ गई ?

दरअसल इस कहानी की शुरुआत पिछले साल से शुरु होती है जहां लोकसभा चुनावों में सपा और बसपा ने ये सोचकर गठबंधन किया था की वो अपने वोट बैंक को साथ लाकर बीजेपी को हरा सकते है लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

इसका विपरीत परिणाम ये हुआ की जीरो सीट वाली बसपा को सपा से अधिक सीट मिल गई। बुआ और भतीजे के रिश्तों में ऐसी दरार आई की उन्होंने आगे कोई भी चुनाव साथ नहीं लड़ने का निर्णय ले लिया।

पिछले साल के लोकसभा चुनावों के बाद से ही लगने लगा था की बहन जी का दलित वोट बैंक कहीं ना कहीं अब उनका वफादार नहीं रहा। इस बात की बानगी देखने को तब मिली जब लॉकडाउन के बाद लाखों मजूदर यूपी आये और उनमें कई दलित थे।

कांग्रेस भी लोकसभा चुनाव बुरी तरह हारी और समय की गंभीरता को देखते हुए राहुल गाँधी ने खुद ही अध्यक्ष पद छोड़ दिया। यूपी में महासचिव प्रियंका ने भी कई बड़े लोगों की छुट्टी की और खुद मोर्चा संभाल लिया।

हमेशा दलितों के लिए खड़ी रहने वाली मायावती इस बार लॉकडाउन में कुछ शांत नजर आई और इसका सबसे बड़ा फायदा मिला कांग्रेस और प्रियंका गाँधी को ! इस बार लॉकडाउन में सड़कों पर प्रियंका थी और मीडिया के कैमरे बस उन्ही को दिखा रहे थे।

एक तरफ प्रियंका की लोकप्रियता और दूसरी और बहन जी की चिंता ! तो कभी बहन जी दिखावे के लिए ही सही ट्वीट कर देती ! ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि ऐसा कांग्रेस का कहना है।

प्रियंका गाँधी ने एक बार खुद ट्वीट करते हुए मायावती को बीजेपी की टीम में ही बता दिया था। जाहिर सी बात है सालों से दलितों की मसीहा बनी मायावती को ये बात कैसे बर्दाश्त होगी ? उन्होंने भी अपने राजस्थान के सभी एमएलए को कांग्रेस से समर्थन लेने को कह दिया।

इसके बाद हाथरस केस में जिस तरह से प्रियंका ने पैदल मार्च किया और पुलिस की लाठियां खाई और आख़िरकार पीड़ित परिवार से जाकर मिली तो उससे तो एक बात जरुर साबित हो गई की प्रियंका गाँधी इतनी जल्दी मैदान नहीं छोड़ने वाली है।

एक और प्रियंका गाँधी हाथरस जाने के लिए सरकार से भिड़ रही थी वही दूसरी और बहन जी उस परिवार के घर भी नहीं गई। पुरे प्रदेश के दलित समाज में इस बात को लेकर रोष है और कई जगह तो प्रदर्शन भी हुए है।

अब कहीं ऐसा तो नहीं है की बीजेपी की पिच पर खेलने के लिए मायावती को साधु संतों की चिंता होने लगी ? दरअसल गोंडा में रामजानकी मंदिर के पुजारी सम्राट दास को गोली मार दी गई जिसको लेकर उन्होंने ट्वीट किया है।

उन्होंने लिखा था की मन्दिर के पुजारी पर भू-माफियाओं द्वारा मन्दिर की जमीन पर कब्जा करने के इरादे से किया गया जानलेवा हमला अति-शर्मनाक अर्थात सन्त की सरकार में अब सन्त भी सुरक्षित नहीं. इससे खराब कानून-व्यवस्था की स्थिति और क्या हो सकती है ?

हालांकि लोग अब उनके ट्वीट के कई मतलब निकाल रहे है लेकिन इतना तो तय है की जिस दलित वोट को मायावती हमेशा अपने पक्ष में समझ रही थी वो उनसे छिटक रहा है और आने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को इस बात का फायदा जरुर मिलेगा।

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