रिपोर्ट: अनुष्का सिंह
नई दिल्ली: भारत का स्वर्ग कश्मीर, वहाँ की वादियां वहाँ की घाटियाँ जो कि इतनी सुंदर है कि सिर्फ देश ही नही बल्कि विदेशों से भी लोग कशमीर की सुंदरता को देखने और अपना कीमती वक्त बिताने कश्मीर आते है। लेकिन कश्मीर के खबरो मे रहने कि वज़ह उसकी खूबसूरती नही बल्कि वहाँ पर आऐ दिन होते रहते बवाल और आतंकी हमले है।
आपको बता दे की कश्मीर घाटी में पिछले पांच दिनों में आतंकवादियों ने सात नागरिकों की हत्या कर दी है। और उसमे सबसे चौकाने वाली बात तो यह है कि कश्मीर घाटी में नागरिकों को टारगेट बनाकर उनकी हत्या किए जाने के बारे में सुरक्षा एजेंसियों को तीन महीने पहले ही मजबूत इनपुट मिल गये थे। मिले इनपुट के अनुसार आतंकवादी तीन समूहों को निशाना बना रहे हैं. ये समूह थे बीजेपी/अपनी पार्टी के नेता, अल्पसंख्यक कश्मीरी पंडित और सिख और सरकार समर्थक आवाजें जिन्हें आतंकवादी सहयोगी कहते हैं।
साथ ही बता दे कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों ने दो दिन के भीतर पांच नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया. इसके बाद घाटी में आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गये है। स्थानीय प्रशासन से लेकर केंद्र सरकार हरकत में आ गई है और बैठकें करके आगे की रणनीति पर काम कर रही है।
सुरक्षा एजेंसी के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार, “हर किसी को सुरक्षा प्रदान नहीं की जा सकती है आतंकवादी आसान लक्ष्य चुन रहे हैं, लेकिन अंततः यह जम्मू-कश्मीर है जहां पर आतंकवादियों को दूर रखने के लिए जवाबी हमले करने होंगे।” साथ हॉ अधिकारियों ने कहा कि आतंकवादी ‘पैटर्न’ के आधार पर लोगों को निशाना बना रहे है, और स्थिति अचानक गंभीर दिख रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ”इसके साथ ही आतंकियों ने कश्मीर घाटी में रह रहे लोगों को आतंकित कर कश्मीरी पंडितों की वापसी को रोकने की कोशिश की है।” उन्होंने कहा, “आतंकियों ने घाटी में सामान्य स्थिति की धारणा को दूर करने के लिए नया कश्मीर के आइडिया को टारगेट किया है।”
आपको बता दे कि कशमीर मे हो रही इन गतिविधियों के पीछे आतंकवाद के पनहाघर पाकिस्तान का हाथ है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह जम्मू-कश्मीर में शांति भंग करने के लिए हाइब्रिड आतंकवादियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि ये आतंकवादी ज्यादातर सामान्य नौकरियों में लगे हुए हैं और छोटे हथियारों का इस्तेमाल कर टारगेट हत्याओं के लिए आतंकवादी समूहों द्वारा इनका इस्तेमाल किया जाता है।
जानकारी के मुताबिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल कश्मीर में कम-से-कम 25 नागरिक मारे गए। इन 25 में से तीन गैर-स्थानीय थे, दो कश्मीरी पंडित थे और 18 मुसलमान थे। सबसे ज्यादा हमले श्रीनगर में हुए, जहां पर 10 ऐसी घटनाएं हुईं।