पन्ना, मध्य प्रदेश। पन्ना विधायक एवं पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह ने जिले की जल व्यवस्था और जलभराव की समस्याओं को लेकर विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया। उन्होंने वार्ड क्रमांक 13, किलकिला फीडर नहर और कुंजवन क्षेत्र में निर्माणाधीन खोरा बांध का जायजा लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान तत्काल समस्याओं के समाधान के साथ भविष्य की जल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण की दीर्घकालीन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
कुछ समय पहले हुई भारी बारिश के कारण वार्ड क्रमांक 13 के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी थी। निरीक्षण के दौरान बृजेंद्र प्रताप सिंह ने नगर पालिका के अधिकारियों से जल निकासी की मौजूदा व्यवस्था की जानकारी ली।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जलभराव का केवल तात्कालिक समाधान करने के बजाय ऐसी स्थायी व्यवस्था तैयार की जाए, जिससे भविष्य में तेज बारिश के दौरान लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
किलकिला फीडर नहर के निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों की आवागमन संबंधी समस्या भी सामने आई। इसे देखते हुए रास्ते को जल्द दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही किलकिला फीडर को पन्ना की व्यापक जल संरक्षण व्यवस्था से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। प्रस्तावित कार्ययोजना के तहत फीडर के माध्यम से लोकपाल सागर, महाराज सागर, बेनी सागर समेत आसपास के छोटे-बड़े जलाशयों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करने पर विचार किया जा रहा है।

पन्ना में गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण चुनौती रहती है। ऐसे में बारिश के पानी को अधिक से अधिक मात्रा में जलाशयों में संरक्षित करना भविष्य की जल जरूरतों को पूरा करने में सहायक हो सकता है।फीडर नहरों, तालाबों और जलाशयों को आपस में बेहतर तरीके से जोड़ने से वर्षाजल के संरक्षण के साथ भूजल स्तर को बनाए रखने में भी मदद मिलने की संभावना है।
कुंजवन स्थित निर्माणाधीन खोरा बांध का भी निरीक्षण किया गया। इस दौरान अधिकारियों से निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी ली गई और काम में तेजी लाकर परियोजना को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए। खोरा बांध के साथ क्षेत्र के अन्य जलाशयों और फीडर नहरों को जल संरक्षण की समन्वित व्यवस्था से जोड़ना पन्ना की दीर्घकालीन जल जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बृजेंद्र प्रताप सिंह के निरीक्षण के दौरान जल निकासी, जलाशयों के पुनर्भरण और निर्माणाधीन जल परियोजनाओं को लेकर अधिकारियों से चर्चा की गई। वार्ड 13 में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के साथ किलकिला फीडर और खोरा बांध जैसी परियोजनाओं को भविष्य की जल सुरक्षा से जोड़ने पर जोर दिया गया। यदि प्रस्तावित व्यवस्था प्रभावी रूप से विकसित होती है, तो बारिश के पानी के संरक्षण और जलाशयों के बेहतर उपयोग से पन्ना की दीर्घकालीन जल उपलब्धता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।