नई दिल्ली : व्यापार रिश्वत जोखिम को मापने वाली वैश्विक सूची में भारत 44 अंकों के साथ साल 2021 में 82वें पायदान पर आया है। पिछले साल के मुकाबले इस साल भारत की रैंकिंग में पांच अंकों की गिरावट आई है। गौरतलब है कि साल 2020 में देश 45 अंकों के साथ सूची में 77वें स्थान पर था।
रिश्वत रोधी मानक सेटिंग संगठन टीआरएसीई की सूची में 194 देशों, क्षेत्रों और स्वायत्त और अर्ध-स्वायत्त क्षेत्रों में व्यापार रिश्वत जोखिम को शामिल किया जाता है। इस साल के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर कोरिया, तुर्कमेनिस्तान, वेनेजुएला और इरीट्रिया सबसे अधिक व्यापारिक रिश्वत जोखिम वाले देश हैं, जबकि डेनमार्क, नॉर्वे, फिनलैंड, स्वीडन और न्यूजीलैंड में यह सबसे कम है। वर्ष 2019 में भारत 48 अंकों के साथ 78वें स्थान पर, 2020 में 45 अंकों के साथ यह 77वें स्थान पर था और इस साल फिसलकर 82वें स्थान पर आ गया है।
प्रमुख चार कारकों पर आधारित रैंकिंग
ये अंक चार कारकों पर आधारित होते हैं, जिनमें सरकार के साथ व्यापारिक बातचीत, रिश्वत प्रतिरोधक और प्रवर्तन, सरकार और सिविल सेवा पारदर्शिता, व मीडिया की भूमिका सहित नागरिक संगठन निगरानी क्षमता शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अपने पड़ोसियों पाकिस्तान, चीन, नेपाल और बांग्लादेश से बेहतर प्रदर्शन किया। इस बीच, भूटान ने 62वीं रैंक हासिल की है। टीआरएसीई के 2021 रिश्वत जोखिम मैट्रिक्स ने एक बयान में कहा कि पिछले 10 वर्षों में व्यापार रिश्वतखोरी जोखिम का माहौल उन देशों में काफी खराब हो गया है, जिन्होंने लोकतांत्रिक बैकस्लाइडिंग का भी अनुभव किया है। इनमें मिस्र, वेनेजुएला, तुर्की, पोलैंड और हंगरी जैसे देश शामिल हैं। गौरतलब है कि वैश्विक रिश्वत जोखिम सूचकांक हर साल जारी किया जाता है।
टीआरएसीई रिश्वतखोरी जोखिम मैट्रिक्स संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय में वी-डेम संस्थान और विश्व आर्थिक मंच सहित प्रमुख सार्वजनिक हित और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से प्राप्त प्रासंगिक डेटा एकत्र करता है। यह डेटा कंपनियों को प्रत्येक देश में रिश्वत की मांग के संभावित जोखिम का आकलन करने और उसके अनुरूप अनुपालन और उचित परिश्रम कार्यक्रम तैयार करने में मदद करता है।