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Global Politics : बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत के लिए नई रणनीति की जरूरत

Global Politics : अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात से वैश्विक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है।दोनों महाशक्तियों के बीच सहयोग बढ़ने से भारत के सामने नई कूटनीतिक चुनौतियाँ और रणनीतिक अवसर पैदा हुए हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को प्रतिस्पर्धा और सहयोग के बीच संतुलन साधते हुए अपनी विदेश नीति को पुनर्गठित करना होगा।

By: RNI Hindi Desk 
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Global Politics : बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत के लिए नई रणनीति की जरूरत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बुसान में हुई मुलाकात के बाद वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। दो घंटे चली इस बैठक को ट्रंप ने “अद्भुत” बताते हुए कहा कि यदि 10 अंकों के पैमाने पर आंका जाए तो यह बैठक 12 अंकों की थी। दोनों महाशक्तियों के बीच टैरिफ, व्यापार और दुर्लभ खनिजों पर बनी सहमति ने विश्व अर्थव्यवस्था और शक्ति-संतुलन पर गहरा प्रभाव डाला है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इन बदलते समीकरणों के बीच अपनी विदेश नीति और आर्थिक रणनीति को नए सिरे से पुनर्गठित करने की आवश्यकता है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने “अमेरिका फर्स्ट” नीति को प्राथमिकता दी, जिससे भारत-अमेरिका संबंधों में कुछ तनाव देखा गया। वहीं, दुर्लभ खनिजों पर चीन की नीतियों ने दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ाया था। अब जब दोनों महाशक्तियां सहयोग के नए दौर में प्रवेश करती दिख रही हैं, भारत को भी इस बदलते परिदृश्य में संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा।

ट्रंप ने इस मुलाकात को “जी-2” करार दिया और शी जिनपिंग को “महान देश का महान नेता” बताया। यह बयान संकेत देता है कि अमेरिका और चीन वैश्विक शक्ति-संतुलन में दो प्रमुख ध्रुव के रूप में उभर सकते हैं। ऐसे में भारत के लिए जरूरी है कि वह प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों के बीच एक संतुलन स्थापित करे।

हालांकि, कई मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं, लेकिन बैठक से यह स्पष्ट है कि दोनों देशों ने व्यापारिक युद्ध की तीव्रता को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब अपनी विदेश नीति में व्यावहारिकता, रणनीतिक लचीलापन और आत्मनिर्भर आर्थिक दृष्टिकोण पर जोर देना चाहिए ताकि वह इन बदलते वैश्विक समीकरणों में अपने हितों की रक्षा कर सके।

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